शिव शंकर सविता- होली से पहले जौनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित एक सरकारी कार्यालय में कथित शराब पार्टी का मामला सामने आने से हड़कंप मच गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए 9 सेकेंड के वीडियो में कार्यालय के अंदर टेबल पर शराब की बोतल और छह ग्लास रखे दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आते ही प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई और मामले की जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। पूरा प्रकरण कलेक्ट्रेट परिसर में डीएम और एसपी कार्यालय के पास स्थित चकबंदी (राजस्व) कार्यालय का बताया जा रहा है। आरोप है कि शनिवार को कार्यालय परिसर में होली मिलन समारोह के दौरान कुछ कर्मचारियों ने अंदर ही शराब पार्टी की। वीडियो में कुछ लोग एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाते हुए भी नजर आ रहे हैं।
कैसे बना वीडियो?
जानकारी के मुताबिक, जब कार्यालय के भीतर कथित रूप से शराब पार्टी चल रही थी, उसी दौरान एक युवक अंदर पहुंच गया और मोबाइल से वीडियो बनाने लगा। वहां मौजूद कर्मचारियों ने उसे रोकने की कोशिश की। वीडियो में एक कर्मचारी यह कहते हुए सुनाई देता है कि “ये गलत है, रहने दीजिए,” और वीडियो न बनाने की अपील करता है। हालांकि युवक ने करीब 9 सेकेंड का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया और उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया। वीडियो वायरल होते ही मामला तेजी से फैल गया। सोशल मीडिया पर लोगों ने सरकारी दफ्तर में इस तरह के आयोजन को लेकर नाराजगी जाहिर की है। कई यूजर्स ने इसे अनुशासनहीनता और सरकारी गरिमा के खिलाफ बताया है।
जांच के आदेश
मामले को तूल पकड़ता देख उप संचालक चकबंदी राम किशोर ने तत्काल जांच के निर्देश दिए हैं। बंदोबस्त अधिकारी शैलेश पाण्डेय को पूरे प्रकरण की जांच सौंपी गई है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि सरकारी कार्यालय में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीन गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी।
सीसीटीवी के बावजूद घटना पर सवाल
जौनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा के लिहाज से चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। जिस कार्यालय में कथित शराब पार्टी हुई, उसके आसपास भी कैमरे होने की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि कैमरों की मौजूदगी के बावजूद इस तरह की घटना कैसे हो गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि डीएम और एसपी कार्यालय के पास स्थित सरकारी दफ्तर में इस तरह की गतिविधि हो सकती है, तो यह प्रशासनिक अनुशासन पर सवाल खड़े करता है।