भगत सिंह- उत्तर प्रदेश में गैस की किल्लत ने अब हिंसक रूप ले लिया है। उपभोक्ताओं की शिकायतों के बावजूद कुछ गैस एजेंसियों के संचालक कालाबाजारी में लिप्त नजर आ रहे हैं। मंगलवार को अराधना गैस एजेंसी के सामने हुई मारपीट का मामला इसका ताजा उदाहरण है। घटना तब हुई, जब गैस लेने आए एक युवक ने खुली कालाबाजारी और सिलेंडर पर अधिक मूल्य लेने का विरोध किया। रिपोर्ट के अनुसार, गैस एजेंसी के संचालक रामेंद्र शर्मा के स्टाफ ने युवक को लात-घूंसे से पीटा। यह पूरी घटना हजारों लोगों के सामने हुई, जो सुबह से सिलेंडर की लाइन में खड़े थे।
कालाबाजारी के गंभीर आरोप
अराधना गैस एजेंसी पर आरोप है कि वह सामान्य घरेलू सिलेंडर को होटलों और निजी दुकानों में 2-3 हजार रुपए में बेची जा रही है। इस तरह गैस की किल्लत और कालाबाजारी का सिलसिला जारी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी तरह से सिलेंडर लेने के लिए उन्हें सूरज की तेज धूप में कई घंटों तक लाइन में खड़ा होना पड़ता है, लेकिन अधिकतर सिलेंडर एजेंसी संचालक के नियंत्रण में चला जाता है। पिछले दिनों एसडीएम सदर नमन मेहता और जिला पूर्ति अधिकारी ने जिले के रेस्टोरेंट्स में छापेमारी के दौरान जप्त किए गए घरेलू सिलेंडरों की जांच की थी। इसी क्रम में अराधना गैस एजेंसी के स्टॉक रजिस्टर और स्टोर की जांच की गई। जांच के दौरान गड़बड़ी पाई गई और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कालाबाजारी की एफआईआर दर्ज कराई गई थी। लेकिन इसके बावजूद सुधार की बजाय हालात और बिगड़ते गए।
सिलेंडर की बढ़ती कीमतें और उपभोक्ताओं की मजबूरी
सरकार ने हाल ही में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी की थी। 945 रुपए का सिलेंडर अब खुलेआम 950 रुपए में बेचा जा रहा है। उपभोक्ता मजबूरी में यह अतिरिक्त भुगतान कर रहे हैं क्योंकि लाइन में घंटों खड़े रहने के बाद भी उन्हें सिलेंडर नहीं मिलता। स्थानीय लोगों के अनुसार, गैस एजेंसी संचालक प्रति दिन ओवर रेट के जरिए 4-5 हजार रुपए तक कमाई कर रहे हैं। वहीं अधिकारियों की सुस्ती और अनदेखी के कारण यह अवैध व्यापार जारी है। लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर क्यों जिम्मेदार अधिकारी आंखें बंद किए बैठे हैं।
मारपीट और उपभोक्ता विरोध
युवक के खिलाफ मारपीट की घटना ने स्थानीय जनता में गुस्सा और भय दोनों पैदा कर दिया है। हजारों लोग सुबह से लाइन में खड़े थे, लेकिन सिलेंडर सिर्फ कुछ सौ लोगों को ही मिल सका। विरोध करने पर एजेंसी संचालक और उनके स्टाफ की हिंसा ने लोगों की नाराजगी बढ़ा दी। स्थानीय प्रशासन ने अभी तक इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। बिठूर थाना क्षेत्र में पुलिस ने मामले की जांच शुरू की है और CCTV फुटेज खंगाली जा रही है ताकि आरोपी वाहन और स्टाफ की पहचान की जा सके।
अधिकारियों की सुस्ती पर सवाल
स्थानीय लोग और उपभोक्ता बार-बार शिकायत कर रहे हैं कि एजेंसियों द्वारा गैस की कालाबाजारी और अधिक कीमत वसूली की जा रही है। इसके बावजूद प्रशासन की कार्रवाई धीमी है। उपभोक्ताओं का कहना है कि ऐसे में गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। बांदा में गैस की यह किल्लत और कालाबाजारी न केवल रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रही है, बल्कि लोगों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बन चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अधिकारी समय रहते कार्रवाई नहीं करेंगे, तो भविष्य में हिंसा और बड़े पैमाने पर उपभोक्ता विरोध की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।