जोड़ो के दर्द की दवा को रैपर समेत से बुजुर्ग की आंतें फटीं, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने बचाई जान

डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से सामने आया एक मामला दवा के इस्तेमाल में लापरवाही और जागरूकता की कमी के खतरनाक परिणामों की चेतावनी देता है। जोड़ों के दर्द से राहत पाने के लिए ली गई एक साधारण-सी गोली 75 वर्षीय बुजुर्ग की जान पर बन आई। मेडिकल स्टोर से खरीदी गई दवा को बुजुर्ग ने ब्लिस्टर पैकिंग समेत निगल लिया, जिससे उसकी आंतें फट गईं और हालत बेहद नाजुक हो गई। समय रहते बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर के डॉक्टरों ने सर्जरी कर बुजुर्ग को नया जीवन दिया। इस दुर्लभ और गंभीर मामले की केस रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल क्यूरियस में प्रकाशित की गई है। कुशीनगर जिले के रहने वाले 75 वर्षीय बुजुर्ग लंबे समय से जोड़ों के दर्द से परेशान थे। इलाज के लिए उन्होंने गांव के पास स्थित एक मेडिकल स्टोर से दवा खरीदी। दुकानदार ने ब्लिस्टर पैकेजिंग वाली दवा की टेबलेट को पत्ते से काटकर दे दिया। बुजुर्ग को यह जानकारी नहीं थी कि टेबलेट को प्लास्टिक रैपर से निकालकर खाना होता है। उन्होंने बिना सोचे-समझे रैपर समेत टेबलेट निगल ली। पहली खुराक के बाद कोई खास परेशानी नहीं हुई, लेकिन दूसरी खुराक लेने के कुछ ही समय बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी।

हालत बिगड़ने पर बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपर किया रेफर

बुजुर्ग को पेट में तेज दर्द और मरोड़ शुरू हो गई। इसके साथ ही खून की उल्टी होने लगी, जिससे परिजन घबरा गए। पहले उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर बीआरडी मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर रेफर कर दिया गया। वहां ट्रॉमा सेंटर में उन्हें भर्ती किया गया और तुरंत जांच शुरू की गई। एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और एंडोस्कोपी जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। डॉक्टरों ने पाया कि ब्लिस्टर पैकिंग का नुकीला प्लास्टिक पेट में फंसकर आंतों को चीर चुका है। इससे आंत में छेद हो गया और संक्रमण फैलकर पेरिटोनाइटिस की स्थिति बन गई, जो जानलेवा हो सकती थी। मरीज की सांसें उखड़ने लगीं और स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी।

सर्जरी कर निकाली पैकिंग, तब बच सकी जान

हालात की गंभीरता को देखते हुए एनेस्थीसिया विभाग के डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी का फैसला लिया। डॉ. शाहबाज अहमद, डॉ. गौरव सिंह और डॉ. प्रियंका द्विवेदी की अगुवाई में डॉक्टरों की टीम ने ऑपरेशन थिएटर में घंटों मेहनत कर सर्जरी की। ऑपरेशन के दौरान मरीज के पेट से ब्लिस्टर पैकिंग समेत टेबलेट निकाली गई और क्षतिग्रस्त आंत की मरम्मत की गई। समय पर सर्जरी होने से बुजुर्ग की जान बच गई। डॉ. शाहबाज अहमद ने बताया कि यह बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अपनी तरह का बेहद दुर्लभ मामला है। बुजुर्ग को यह जानकारी ही नहीं थी कि दवा को पैकिंग से निकालकर खाया जाता है। ब्लिस्टर प्लास्टिक रैपर के कारण इंटेस्टाइनल परफोरेशन हुआ और आंत में गंदा खून पहुंचने से पूरे शरीर में संक्रमण फैलने लगा। दुनिया में ऐसे मामले बहुत कम देखने को मिलते हैं।

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