जम्मू-कश्मीर के डोडा में शहीद हुए जवान मोनू चौधरी को नम आंखों से अंतिम विदाई, राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

डिजिटल डेस्क- अलीगढ़ जिले के जवा थाना क्षेत्र के दाऊपुर गांव में शुक्रवार को गम और गर्व का माहौल एक साथ देखने को मिला। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में ड्यूटी के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में शहीद हुए भारतीय सेना के जवान मोनू चौधरी का उनके पैतृक गांव में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, पूरा इलाका “भारत माता की जय” और “शहीद मोनू चौधरी अमर रहें” के नारों से गूंज उठा। हर आंख नम थी और हर दिल अपने इस वीर सपूत पर गर्व कर रहा था। मोनू चौधरी वर्ष 2018 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे और तभी से देश की सेवा में समर्पित थे। वर्तमान में उनकी पोस्टिंग जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में थी। हाल ही में डोडा में सेना का एक वाहन अनियंत्रित होकर करीब 200 फीट गहरी खाई में गिर गया था। इस भीषण हादसे में मोनू चौधरी सहित कुल 10 जवान शहीद हो गए थे। जैसे ही यह दुखद समाचार गांव पहुंचा, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।

पिता चक्की चलाकर करते हैं परिवार का पालन-पोषण

शहीद मोनू चौधरी के पिता प्रताप चौधरी गांव में रहकर चक्की चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। परिवार में तीन बेटे हैं। बड़े बेटे सोनू चौधरी गांव में ही रहकर पिता के चक्की के व्यवसाय में हाथ बंटाते हैं, जबकि सबसे छोटे बेटे प्रशांत चौधरी भी बीएसएफ में तैनात हैं और देश की सेवा कर रहे हैं। मोनू चौधरी अपने पिता के दूसरे नंबर के बेटे थे। मोनू चौधरी अपने पीछे पत्नी और डेढ़ वर्ष की मासूम बेटी को छोड़ गए हैं। शहीद की पत्नी और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। गांव की महिलाओं और बुजुर्गों की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे, लेकिन सभी को इस बात का गर्व भी था कि उनके घर का बेटा देश के लिए शहीद हुआ है।

डीएम, एसएसपी, विधायक समेत कई लोग रहे उपस्थित

अंतिम संस्कार के दौरान बरौली विधानसभा क्षेत्र के विधायक जयवीर सिंह, अलीगढ़ के जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सहित जिले के तमाम आला अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। सेना के अधिकारी और जवान भी भारी संख्या में पहुंचे। सेना के जवानों ने शहीद को सलामी दी और पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान सेना के अधिकारियों ने शहीद के परिजनों को तिरंगा झंडा भेंट किया। मोनू चौधरी की शिक्षा-दीक्षा बुलंदशहर जिले की खुर्जा तहसील के गांव बकराई में हुई थी, जहां वह अपनी मौसी के पास रहकर पढ़ाई करते थे। उनका गांव अलीगढ़ और बुलंदशहर जिले की सीमा पर स्थित है, जिस कारण दोनों जिलों के आसपास के गांवों से हजारों लोग अंतिम संस्कार में शामिल होने पहुंचे। हजारों नम आंखों ने शहीद मोनू चौधरी के जज्बे और बलिदान को सलाम किया।

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