उत्तराखंड में जनगणना का पहला चरण 10 अप्रैल से शुरू, स्व-गणना पर विशेष जोर

KNEWS DESK- उत्तराखंड में जनगणना 2026 के पहले चरण की शुरुआत 10 अप्रैल से होने जा रही है। इस चरण का शुभारंभ राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह करेंगे। सरकार ने इस बार जनगणना प्रक्रिया को आधुनिक और डिजिटल बनाने पर खास जोर दिया है।

पहले चरण में मकान सूचीकरण और मकान गणना का कार्य किया जाएगा, जिसके लिए कुल 30,839 कर्मचारियों की टीम तैनात की गई है। इसमें 4,491 सुपरवाइजर और 26,348 प्रगणक शामिल हैं। यह टीम 25 अप्रैल से 24 मई तक राज्यभर में घर-घर जाकर आंकड़े एकत्र करेगी।

इससे पहले 10 अप्रैल से 24 अप्रैल तक लोगों को स्व-गणना (Self Enumeration) का मौका दिया जाएगा। इसके लिए Census Self Enumeration Portal (se.census.gov.in) लॉन्च किया गया है, जहां नागरिक स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। पोर्टल पर 16 क्षेत्रीय भाषाओं में सवालों के जवाब देने की सुविधा उपलब्ध है, जिससे अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जा सके।

जनगणना विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस बार पूरी प्रक्रिया मोबाइल एप्लिकेशन आधारित होगी। स्व-गणना के बाद नागरिकों को एक यूनिक सेल्फ एनुमरेशन आईडी (SE ID) दी जाएगी, जिसे प्रगणकों को दिखाना होगा। इसके जरिए डेटा संग्रहण को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने की कोशिश की जा रही है।

विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए अलग योजना बनाई गई है। दूसरे चरण में चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी जैसे हिमाच्छादित जिलों के 131 गांवों और तीन शहरी क्षेत्रों में 11 से 30 सितंबर के बीच जनगणना होगी।

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी गांव में मकान बंद या खंडहर स्थिति में मिलता है, तो उसे “लॉक हाउस” के रूप में दर्ज किया जाएगा।

सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे स्व-गणना में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें, ताकि राज्य का सटीक और व्यापक डेटा तैयार किया जा सके, जो भविष्य की योजनाओं और विकास कार्यों में अहम भूमिका निभाएगा।

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