‘नाम देखा, रोल नंबर नहीं देखा…’ UPSC में 113वीं रैंक पर गलत दावा करने वाली शिखा की कैसे खुली पोल, मायूस हुआ परिवार…

KNEWS DESK- उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में सिविल सेवा परीक्षा में सफलता के दावे को लेकर चर्चा में आई Shikha Gautam का मामला अब पूरी तरह साफ हो गया है। जांच में सामने आया है कि जिस 113वीं रैंक का दावा किया गया था, वह वास्तव में दिल्ली की रहने वाली एक अन्य अभ्यर्थी Shikha की है। इसके बाद बुलंदशहर की शिखा और उनके परिवार ने सार्वजनिक तौर पर अपनी गलती स्वीकार कर ली है।

दरअसल, परिणाम घोषित होने के बाद बुलंदशहर की शिखा ने दावा किया था कि उन्होंने 113वीं रैंक हासिल कर Union Public Service Commission की सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली है। यह खबर सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर तेजी से फैल गई। कई जगह उन्हें बधाई दी गई और परिवार में जश्न का माहौल बन गया।

लेकिन बाद में पता चला कि शिखा ने परिणाम की पीडीएफ सूची में केवल अपना नाम देखा और यह मान लिया कि उनका चयन हो गया है। उन्होंने रोल नंबर या अन्य विवरण की सही तरीके से जांच नहीं की थी। जब सूची में दर्ज रोल नंबर और अन्य जानकारी का मिलान किया गया, तब स्पष्ट हुआ कि 113वीं रैंक किसी अन्य अभ्यर्थी की है।

जांच में सामने आया कि 113वीं रैंक की असली उम्मीदवार दिल्ली की शिखा हैं, जो फिलहाल हरियाणा के Rohtak जिले में खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। सही जानकारी सामने आने के बाद बुलंदशहर की शिखा का दावा गलत साबित हो गया।

मामला सामने आने के बाद बुलंदशहर की शिखा मीडिया के सामने आईं और अपनी गलती स्वीकार की। उन्होंने कहा कि रिजल्ट देखने के समय वह काफी उत्साहित थीं और सिर्फ नाम देखकर ही चयन मान लिया। उन्होंने रोल नंबर की जांच नहीं की थी।

शिखा के पिता प्रेमचंद ने भी इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि जब बेटी ने चयन की जानकारी दी तो परिवार ने उस पर भरोसा कर लिया और बिना पूरी जांच किए यह बात लोगों तक पहुंचा दी। बाद में जब सच्चाई सामने आई तो उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ।

इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि एसडीएम सदर ने कहा कि ऐसी परीक्षाओं के परिणामों के मामले में आधिकारिक जानकारी की पुष्टि करना जरूरी होता है। बिना जांच के किसी भी तरह का दावा करने से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।

इससे पहले भी यूपीएससी परिणाम को लेकर इसी तरह का मामला सामने आया था, जब Akanksha Singh के नाम पर 301वीं रैंक का दावा किया गया था। बाद में जांच में स्पष्ट हुआ कि वास्तविक चयन उत्तर प्रदेश के Ghazipur की आकांक्षा सिंह का हुआ था।

यह पूरा मामला एक बार फिर इस बात की याद दिलाता है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणामों को लेकर आधिकारिक विवरण और रोल नंबर की सही तरीके से पुष्टि करना कितना जरूरी होता है।

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