डिजिटल डेस्क- सोशल मीडिया और मीम्स के जरिए देशभर में चर्चा में आया भोपाल का ऐशबाग रेलवे ओवरब्रिज एक बार फिर सुर्खियों में है। पिछले साल जून में जब इस पुल के कथित 90-डिग्री मोड़ की तस्वीरें वायरल हुई थीं, तब मध्य प्रदेश की इंजीनियरिंग व्यवस्था का जमकर मजाक उड़ाया गया था। अब इस विवाद पर लोक निर्माण विभाग (PWD) के मंत्री ने विधानसभा में चुप्पी तोड़ते हुए विभाग का बचाव किया है। बजट अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि ऐशबाग ब्रिज को लेकर जो धारणा बना दी गई है, वह पूरी तरह तथ्यों पर आधारित नहीं है। उन्होंने कहा कि सबसे पहले यह स्पष्ट कर देना जरूरी है कि यह पुल 90-डिग्री का नहीं है। हाई कोर्ट की जांच में इसका मोड़ 119-डिग्री का पाया गया है।
‘एंगल नहीं, तकनीकी खामी थी वजह’
मंत्री ने विधानसभा में कहा कि जब किसी घनी आबादी वाले और पहले से विकसित शहर के बीच विकास कार्य किए जाते हैं, तो डिजाइन उपलब्ध जमीन के अनुसार ही तैयार करनी पड़ती है। उन्होंने दावा किया कि देश के कई विकसित राज्यों और विदेशों में भी 90-डिग्री तक के मोड़ वाले पुल और सड़कें आम बात हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि विभाग द्वारा की गई कार्रवाई एंगल को लेकर नहीं थी। असल समस्या पुल के ढाल (स्लोप) और घुमाव की तकनीकी खामियों से जुड़ी थी। मंत्री के मुताबिक, इन तकनीकी पहलुओं में सुधार की जरूरत थी, जिस पर कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की छवि को नुकसान पहुंचाना ठीक नहीं है और चाहे सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, किसी को भी अपने राज्य की फजीहत अच्छी नहीं लगती।
18 करोड़ की लागत, डिजाइन पर सवाल
गौरतलब है कि करीब 18 करोड़ रुपये की लागत से बने इस रेलवे ओवरब्रिज ने उस समय विवाद खड़ा कर दिया था, जब इसके तीखे मोड़ की तस्वीरें वायरल हुईं। स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स का कहना था कि यह डिजाइन हादसों को न्योता दे सकता है। कई लोगों ने इसे ‘खतरनाक मोड़’ बताते हुए सुरक्षा पर सवाल उठाए थे। विपक्ष ने भी इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था और निर्माण की गुणवत्ता तथा डिजाइन प्रक्रिया की जांच की मांग की थी। हालांकि, सरकार का कहना है कि पुल का निर्माण तकनीकी मानकों के तहत किया गया है और जो कमियां थीं, उन्हें दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।