KNEWS DESK- मध्य प्रदेश की राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों के लिहाज़ से 18 फरवरी का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। राज्य के वित्त मंत्री Jagdish Devda वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे। यह Mohan Yadav सरकार का तीसरा बजट होगा, जिस पर राजनीतिक और आर्थिक हलकों की खास नजर है।
सूत्रों के मुताबिक इस बार बजट का आकार 4.65 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। राज्य की औसत 10 प्रतिशत जीएसडीपी वृद्धि दर को देखते हुए इसे अब तक का रिकॉर्ड बजट माना जा रहा है। पहली बार प्रदेश में ‘रोलिंग बजट’ की अवधारणा भी लागू की जाएगी, जिसके तहत 2026-27 से 2028-29 तक की तीन वर्षीय वित्तीय योजना एक साथ पेश की जाएगी। इसे आगामी चुनावों से पहले सरकार के विकास रोडमैप के रूप में भी देखा जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस बजट में पंचायत और निकाय चुनावों की स्पष्ट झलक देखने को मिल सकती है। ग्रामीण विकास, नगरीय अधोसंरचना, रोजगार सृजन और सामाजिक योजनाओं पर विशेष फोकस रहने की संभावना है। सरकार विकास और जनहित योजनाओं के जरिए बड़ा राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में है।
बजट से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूत बताया है। उनका कहना है कि कनेक्टिविटी, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और रोजगार सृजन के कारण प्रदेश की विकास दर तेज हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रति व्यक्ति आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो राज्य की बेहतर वित्तीय प्रबंधन क्षमता को दर्शाती है।
इस बार स्वास्थ्य क्षेत्र को भी बजट में बड़ी प्राथमिकता मिल सकती है। ‘सीएम केयर’ योजना के तहत स्टेट कार्डियक सेंटर, अंग प्रत्यारोपण संस्थान और मेडिकल कॉलेजों में कैंसर व हार्ट सुपर-स्पेशियलिटी विभाग स्थापित किए जाने की योजना है। अगले पांच वर्षों में इन परियोजनाओं पर करीब 2,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
सरकार 12 वेलनेस और आस्था टूरिज्म हब विकसित करने की तैयारी में है। Ujjain से Khajuraho तक 12 वेलनेस स्थलों का विकास प्रस्तावित है। आयुष वीजा से जुड़कर मध्य प्रदेश को देश का दूसरा बड़ा वेलनेस डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
कुल मिलाकर, यह बजट केवल आय-व्यय का लेखा-जोखा नहीं बल्कि अगले तीन वर्षों के विकास और चुनावी रणनीति का व्यापक खाका भी माना जा रहा है। अब देखना होगा कि सरकार जनता की अपेक्षाओं पर किस हद तक खरी उतरती है।