हाईकोर्ट सख्त, निकाय चुनाव कब ?

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में लोकसभा चुनाव संपन्न होने के बाद अब राज्य में निकाय चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है। तमाम राजनीतिक दलों के साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग इसकी तैयारियों में लगा हुआ है। धामी सरकार भी निकाय चुनाव से पहले शेष बचे हुए कार्यों को जल्द पूरा करने की कोशिशों मे लग गई है। इस बीच राज्य सरकार ने महत्वकांक्षी स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत अधिकांश कार्यों के पूरा होने का दावा किया है। राज्य के शहरी विकास मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने स्मार्ट सिटी लि के अधिकारियों की बैठक ली। बैठक में मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने स्मार्ट सिटी के कार्यों पर खुशी जताई है। उन्होने स्मार्ट सिटी के कार्यों के प्रचार प्रसार के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। इसके साथ ही शेष कार्यों को इसी जून में पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इस बीच निकाय चुनाव से पहले राज्य में अतिक्रमण के मुद्दे पर सियासत गरमा गई है.. दअरसल एनजीटी ने रिस्पना नदी किनारे 11 मार्च 2016 के बाद हुए अवैध अतिक्रमण को धवस्त करने का आदेश दिया है। जिसके बाद रिस्पना किनारे 525 मकान चिन्हित किये गये हैं। सरकार इस अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। हालांकि कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि सरकार 11 मार्च 2016 के पहले बने मकानों को भी धवस्त कर लोगों को बेघर कर रही है। अतिक्रमण पर मचे घमासान के बीच नैनीताल हाईकोर्ट ने अवमानना का नोटिस जारी कर सरकार की टेंशन को बढ़ा दिया है। दअरसल कोर्ट ने राज्य में निकाय चुनाव को लेकर दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 11 जून तक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। सवाल ये है कि आखिर क्यों धामी सरकार निकाय चुनाव अबतक नहीं करा पाई है। आखिर क्यों बार-बार सरकार को कोर्ट की फटकार पड़ रही है

 देवभूमि उत्तराखंड में निकाय चुनाव पर मची रार लगातार जारी है। धामी सरकार एक ओर जहां प्रशासकों का कार्यकाल बढ़ा रही है तो वहीं दूसरी ओर विपक्ष लगातार सत्तापक्ष से जल्द निकाय चुनाव कराने की मांग कर रहा है। लेकिन अबतक इस दिशा में कोई खास कार्य नहीं हुआ है। वहीं विपक्ष के दबाव के बीच नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अवमानना का नोटिस जारी कर सरकार की चिंता बढ़ा दी है। दअरसल हाईकोर्ट ने निकाय चुनाव की तय सीमा समाप्त होने के बाद राज्य सरकार द्वारा समय पर निकाय चुनाव न कराए जाने को लेकर सरकार को नोटिस जारी कर 11 जून तक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। वहीं कोर्ट के नोटिस के बाद विपक्ष सत्तापक्ष पर हमलावकर हो गया है

आपको बता दें कि प्रदेश के सौ नगर निकायों का पांच वर्ष का कार्यकाल पिछले साल दो दिसंबर को खत्म होने के बाद सरकार ने इन्हें प्रशासकों के हवाले कर दिया था। इसके बाद भी धामी सरकार ने एक बार फिर प्रशासकों का कार्यकाल बढ़ा दिया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार हार के डर से निकाय चुनाव कराने से बच रही है। वहीं धामी सरकार निकाय चुनाव से पहले शेष बचे विकास कार्यों को पूरा कराने मे लगी हुई है। इस बीच सरकार का दावा है कि जून 2024 तक स्मार्ट सिटी के शेष कार्यों को पूरा कर लिया जाएगा। वहीं इस बीच विपक्षी दलों ने अतिक्रमण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान पर भी सवाल उठाए हैं।

 

कुल मिलाकर लोकसभा चुनाव संपन्न होने के बाद राज्य में अब आगामी चुनाव की तैयारी शुरु हो गई है। सरकार एक ओर जहां विकास कार्यों को जल्द पूरा कर निकाय चुनाव में इसका लाभ लेने की कोशिश करेगी तो वहीं दूसरी ओर विपक्ष अतिक्रमण के मुद्दे पर सरकार को घेर अपनी सियासत चमकाने की कोशिश कर रहा है। वहीं इस बीच कोर्ट के नोटिस ने सरकार की टेंशन बढ़ा दी है ऐसे में देखना होगा सरकार कोर्ट में इसका क्या जवाब देती है। सवाल ये भी है कि आखिर क्यों बार बार सरकार निकाय चुनाव को टाल रही है…आखिर कोर्ट में हलफनामा देने के बाद भी सरकार अबतक निकाय चुनाव क्यों नहीं करा पाई है। सवाल ये भी है कि क्या सरकार मौजूदा समय सीमा में भी निकाय चुनाव कराने के लिए तैयार है या नहीं

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