डिजिटल डेस्क- राजधानी दिल्ली में प्रशासनिक लापरवाही के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। जनकपुरी में दिल्ली जल बोर्ड के खुले गड्ढे में बाइक सवार की मौत का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि रोहिणी सेक्टर-32 से एक और दर्दनाक घटना सामने आ गई। यहां काली मंदिर के पास खुले मैनहोल में गिरने से 27 वर्षीय मजदूर बिरजू की मौत हो गई। इस हादसे ने एक बार फिर राजधानी में बुनियादी सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना मंगलवार, 10 जनवरी को दोपहर करीब 2 बजकर 36 मिनट पर सामने आई, जब बेगमपुर थाना पुलिस को एक पीसीआर कॉल मिली। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। इसके साथ ही डीडीए और दमकल विभाग की टीमों को भी बुलाया गया। मौके पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन काफी प्रयासों के बावजूद युवक को बचाया नहीं जा सका। मैनहोल से बाहर निकाले जाने तक बिरजू की मौत हो चुकी थी।
सड़क के बराबर में बना था मैनहोल, नियमों को रखा गया ताक पर
बताया जा रहा है कि जिस मैनहोल में युवक गिरा, वह सड़क की सतह के बिल्कुल बराबर बना हुआ था। आमतौर पर एहतियात के तौर पर मैनहोल को सड़क की ऊंचाई से थोड़ा ऊपर रखा जाता है ताकि वह साफ दिखाई दे और वाहन या पैदल चलने वाले लोग उससे बच सकें। लेकिन यहां ऐसा कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं था। आरोप है कि दिल्ली जल बोर्ड और संबंधित एजेंसियों की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से कई मैनहोल खुले पड़े थे। कई बार इसकी शिकायत भी की गई, लेकिन प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि युवक की बॉडी निकालने के बाद शाम करीब 7:30 बजे मैनहोल पर ढक्कन लगाया गया। उनका आरोप है कि यह कार्रवाई हादसे के बाद लापरवाही छुपाने के लिए की गई।
पर्याप्त रोशनी होती तो बच जाता बिरजू
एक अन्य निवासी सचिन ने कहा कि इलाके में बड़े-बड़े विकास परियोजनाएं चल रही हैं, लेकिन सुरक्षा के मूलभूत इंतजामों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। उन्होंने बताया कि कई मैनहोल पहले से खुले थे और हादसे के बाद आनन-फानन में उन्हें ढका गया। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते इन मैनहोल को बंद किया गया होता और सड़क पर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था होती, तो बिरजू की जान बचाई जा सकती थी। स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि रात के समय सड़क पर अंधेरा रहता है, जिससे खतरा और बढ़ जाता है। खुले मैनहोल और अपर्याप्त रोशनी मिलकर जानलेवा स्थिति पैदा कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशासन को नियमित निरीक्षण और रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।