शिव शंकर सविता- दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के नेता और कैबिनेट मंत्री प्रवेश वर्मा ने विधानसभा में चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने केजरीवाल के सरकारी आवास को लेकर सवाल उठाते हुए इसे भाजपा द्वारा दिए गए नाम ‘शीशमहल’ से जोड़कर हमला बोला। विधानसभा में दिए गए बयान के एक दिन बाद प्रवेश वर्मा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ‘धुरंधर पार्ट-3’ नाम से एक वीडियो साझा किया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में उन्होंने 6, फ्लैग स्टाफ रोड स्थित सरकारी आवास के अंदरूनी हिस्सों को दिखाने का दावा किया है और वहां हुए खर्च का विस्तृत जिक्र किया है। वर्मा के मुताबिक, इस सरकारी आवास की सजावट पर करीब 60 करोड़ रुपये खर्च किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें महंगे झूमर, डिजाइनर पर्दे, चिमनी, बड़े टीवी, जकूजी और अन्य लग्जरी सुविधाएं शामिल हैं। उनका दावा है कि यह पूरा खर्च आम जनता के पैसे से किया गया, जो गंभीर सवाल खड़े करता है।
शीशमहल के बगल में बन रहे भवन को बताया शीशमहल का एक्सटेंशन
अपने वीडियो और बयान में वर्मा ने केजरीवाल पर तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने “सादगी और ईमानदारी” की छवि बनाकर सत्ता हासिल की, लेकिन बाद में उसी भरोसे का दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा कि जनता ने ‘शीशमहल’ का नाम कई बार सुना है, लेकिन अब वह इसकी वास्तविक तस्वीर भी देख रही है। इतना ही नहीं, प्रवेश वर्मा ने एक और बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि इस आवास के पास एक बड़े विस्तार (एक्सटेंशन) की योजना भी बनाई जा रही थी।
उनके अनुसार, अगर केजरीवाल दोबारा सत्ता में आते, तो ‘शीशमहल’ के पास ही एक और भव्य निर्माण कराया जाता। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस विस्तार परियोजना पर पहले ही करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके थे और उसका ढांचा तैयार किया जा रहा था।
आम आदमी पार्टी लगातार खारिज करता रहा है अपने ऊपर लगे आरोप
हालांकि, आम आदमी पार्टी की ओर से इन आरोपों को पहले भी खारिज किया जाता रहा है। पार्टी का कहना है कि यह सब राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा है और जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। आप नेताओं ने पहले भी कहा है कि सरकारी आवास से जुड़े सभी खर्च नियमों और प्रक्रियाओं के तहत किए गए हैं। दिल्ली की सियासत में ‘शीशमहल’ मुद्दा लंबे समय से चर्चा में बना हुआ है और चुनावी माहौल में इसे एक बड़ा राजनीतिक हथियार माना जा रहा है। बीजेपी जहां इसे भ्रष्टाचार और फिजूलखर्ची का उदाहरण बता रही है, वहीं आप इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई और छवि खराब करने की कोशिश करार दे रही है।