JNU सिर्फ संस्थान नहीं, एक जीवंत संस्कृति है” — 9वें दीक्षांत समारोह में बोले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान

डिजिटल डेस्क- जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के 9वें दीक्षांत समारोह में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शिरकत की और छात्रों, प्रोफेसरों व विश्वविद्यालय प्रशासन को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने जेएनयू की अकादमिक परंपरा, बौद्धिक विरासत और राष्ट्रीय जीवन में उसके योगदान की जमकर सराहना की। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन भी विशेष रूप से मौजूद रहे। अपने संबोधन में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जेएनयू अपने समय से आगे सोचने वाली एक प्रयोगशाला रहा है। यह विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाला संस्थान नहीं, बल्कि विचारों को गढ़ने, परखने और विकसित करने का एक सशक्त मंच है। उन्होंने कहा कि जेएनयू की एक समृद्ध (rich) विरासत रही है और यहां का Interdisciplinary research focus, JNU के DNA का हिस्सा है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि जेएनयू का अकादमिक वातावरण नेतृत्व विकसित करने का एक मजबूत केंद्र रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “JNU अब सिर्फ एक यूनिवर्सिटी नहीं, बल्कि एक संस्कृति है।” यहां की बहस, चर्चा, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और वैचारिक संवाद की परंपरा ने इसे देश का एक प्रमुख बौद्धिक केंद्र बनाया है।

पूर्व छात्रों का उल्लेख

धर्मेंद्र प्रधान ने अपने भाषण में जेएनयू के कई प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों का जिक्र किया। उन्होंने डी. पी. त्रिपाठी, कॉमरेड सीताराम येचुरी, कॉमरेड प्रकाश और देश की वर्तमान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का नाम लेते हुए कहा कि जेएनयू ने सार्वजनिक जीवन को दिशा देने वाले अनेक व्यक्तित्व दिए हैं। उन्होंने अपने मित्र और वर्तमान सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास का भी उल्लेख किया, जिन्होंने सार्वजनिक जीवन में खास पहचान बनाई है।

क्रिटिकल थिंकिंग जेएनयू की आत्मा

शिक्षा मंत्री ने कहा कि क्रिटिकल थिंकिंग जेएनयू की आत्मा में रची-बसी है। यह ऐसा स्थान है, जहां विचारों को चुनौती दी जाती है, निखारा जाता है और उन्हें राष्ट्रीय नीतियों तक पहुंचने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि जेएनयू का बौद्धिक योगदान भारत की लोकतांत्रिक और नीतिगत सोच को लगातार समृद्ध करता रहा है। अपने सोशल मीडिया संदेश में छात्रों को संबोधित करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि कुछ छात्र संसद और विधानसभाओं तक पहुंचकर लोकतंत्र को मजबूत करें, कुछ कर्तव्य भवन में राष्ट्र सेवा करें, कुछ रणनीतिक विशेषज्ञ और राजदूत बनकर भारत की वैश्विक भूमिका को सशक्त करें, वहीं कुछ नवाचार और उद्यमिता के जरिए स्टार्टअप्स और यूनिकॉर्न्स की नींव रखें।