डिजिटल डेस्क- दिल्ली में आयोजित एआई समिट में रोबोडॉग को लेकर उठे विवाद के बीच गलगोटिया यूनिवर्सिटी एक बार फिर सुर्खियों में है। यूनिवर्सिटी पर आरोप लगा कि समिट में प्रदर्शित रोबोडॉग को छात्रों द्वारा विकसित बताया गया, जबकि सोशल मीडिया पर इसे चीन की कंपनी का प्रोडक्ट बताया गया। तस्वीरें वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ गया और यूनिवर्सिटी ने स्टॉल से रोबोडॉग हटा लिया। फिलहाल आधिकारिक विस्तृत बयान का इंतजार किया जा रहा है।
कौन हैं फाउंडर?
गलगोटिया यूनिवर्सिटी के संस्थापक सुनील गलगोटिया हैं। यूनिवर्सिटी की स्थापना वर्ष 2011 में हुई थी। वर्तमान में इसके सीईओ ध्रुव गलगोटिया हैं, जो सुनील गलगोटिया के बेटे हैं। ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेसवे के पास स्थित यह यूनिवर्सिटी आज ग्रेजुएशन से लेकर पीएचडी तक के कोर्स ऑफर करती है और नॉर्दन इंडिया की प्रमुख निजी यूनिवर्सिटीज में गिनी जाती है।
एक बुक स्टोर से शुरुआत
गलगोटिया परिवार का शुरुआती सफर बेहद साधारण था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1930 के दशक में दिल्ली के कनॉट प्लेस में ‘ईडी गलगोटिया एंड संस’ नाम से एक बुक शॉप हुआ करती थी। यहीं से शिक्षा जगत में कदम रखने की कहानी शुरू हुई। 1980 के दशक में सुनील गलगोटिया ने ‘गलगोटिया पब्लिकेशंस’ की शुरुआत की। बताया जाता है कि उन्होंने अपनी पहली किताब ‘Power System Control and Stability’ को प्रकाशित करने के लिए 9,000 रुपये उधार लिए थे। इसके बाद उन्हें Barron’s की SAT, TOEFL, GRE और GMAT जैसी परीक्षाओं की किताबों के भारत में डिस्ट्रीब्यूशन राइट्स मिले और कारोबार ने रफ्तार पकड़ ली।
40 छात्रों से यूनिवर्सिटी तक
साल 2000 में 40 छात्रों के साथ गलगोटियाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी की स्थापना की गई। इसके बाद गलगोटिया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी शुरू हुआ। आखिरकार 2011 में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की स्थापना हुई। आज इस ग्रुप में 40,000 से ज्यादा छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। 40 से अधिक देशों के छात्र यहां शिक्षा ले रहे हैं, जबकि 1 लाख से ज्यादा पूर्व छात्र 96 देशों में कार्यरत बताए जाते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक छोटे से बुक स्टोर से शुरू हुआ यह सफर अब करीब 3000 करोड़ रुपये के कारोबार में बदल चुका है।