KNEWS DESK- मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से फैल रही उल्टी-दस्त की बीमारी ने गंभीर रूप ले लिया है। शुक्रवार को 60 वर्षीय गीता बाई धुरकर की इलाज के दौरान मौत हो गई, जिससे इलाके में दहशत का माहौल है। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के प्रति भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। स्थानीय नागरिकों का दावा है कि दूषित पानी पीने से अब तक करीब 10 से 15 लोगों की जान जा चुकी है।
बीते दिनों भागीरथपुरा में अचानक उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी थी। कई घरों में एक साथ कई लोग बीमार पड़ गए थे। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घर-घर सर्वे और जांच भी की थी। मृतक महिला के परिजनों के अनुसार, उस दौरान गीता बाई को भी उल्टी और दस्त की शिकायत हुई थी, जिसके बाद उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिवार के अन्य सदस्यों—बेटे और भतीजे—को भी इसी तरह की समस्या हुई थी, लेकिन समय पर इलाज मिलने से वे ठीक हो गए।
परिजनों का कहना है कि गीता बाई की उम्र अधिक होने और लगातार उल्टी-दस्त के कारण शरीर में पानी की भारी कमी हो गई, जिससे उनकी हालत बिगड़ती चली गई और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में लंबे समय से गंदा और बदबूदार पानी सप्लाई हो रहा था। कई बार शिकायतों के बावजूद नगर निगम और संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई नहीं की। अब हालात इतने बिगड़ गए हैं कि लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है। लोगों की मांग है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और इलाके में तुरंत शुद्ध पेयजल की व्यवस्था हो।
मौतों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि उन्हें दूषित पानी से फैले प्रकोप में 10 लोगों की मौत की जानकारी मिली है। वहीं स्थानीय नागरिकों और क्षेत्र के भाजपा पार्षद का दावा है कि 6 माह के बच्चे समेत करीब 15 लोगों की जान जा चुकी है और एक व्यक्ति की हालत अभी भी गंभीर है। स्वास्थ्य विभाग ने हालांकि इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. माधव प्रसाद हासानी ने बताया कि एक मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई है कि भागीरथपुरा में पाइपलाइन में लीकेज के कारण पेयजल दूषित हुआ। अधिकारियों के अनुसार, एक पुलिस चौकी के पास मुख्य पाइपलाइन में उस स्थान पर लीकेज मिला है, जिसके ऊपर शौचालय बना हुआ है। इसी वजह से पानी में संक्रमण फैलने की आशंका जताई गई है।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, पिछले 9 दिनों में इस प्रकोप से 1400 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। अब तक 272 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जिनमें से 71 को छुट्टी दी जा चुकी है। फिलहाल 201 मरीज अस्पतालों में इलाजरत हैं, जिनमें 32 की हालत गंभीर बनी हुई है और वे आईसीयू में भर्ती हैं।
लगातार हो रही मौतों और बढ़ते मरीजों की संख्या ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग जल्द से जल्द ठोस कार्रवाई और सुरक्षित पेयजल व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, ताकि आगे कोई और जान न जाए।