डिजिटल डेस्क- पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में इस बार ईद का नजारा सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी बेहद अहम रहा। पिछले दो दशकों से चली आ रही परंपरा इस बार टूट गई, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद ईद के मौके पर मैदान में नजर नहीं आए। उनकी जगह पहली बार उनके बेटे निशांत कुमार ने शिरकत की और लोगों को ईद की मुबारकबाद दी। नीतीश कुमार का गांधी मैदान में ईद के मौके पर पहुंचना एक स्थायी राजनीतिक परंपरा रही है। हर साल वह नमाज के बाद मुस्लिम समुदाय से मिलते और सामाजिक सौहार्द का संदेश देते थे। ऐसे में इस बार उनकी गैरमौजूदगी ने सियासी हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, लेकिन मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सका।
इन दिनों राजनीति में सक्रिय दिख रहे हैं निशांत कुमार
इस बीच निशांत कुमार की मौजूदगी ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया। अब तक सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखने वाले निशांत हाल के दिनों में तेजी से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हुए हैं। जेडीयू की सदस्यता लेने के बाद उनकी बढ़ती भागीदारी को राजनीतिक ‘ग्रूमिंग’ के तौर पर देखा जा रहा है। गांधी मैदान में उनकी उपस्थिति को कई लोग नीतीश कुमार के संभावित उत्तराधिकारी के संकेत के रूप में भी देख रहे हैं। लेकिन असली सियासी हलचल तब तेज हुई, जब निशांत कुमार कार्यक्रम खत्म होने के बाद सीधे जेडीयू के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के आवास पहुंचे। दोनों के बीच करीब 15 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत हुई। इस गोपनीय मुलाकात ने बिहार की राजनीति में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।
मुलाकात के हो सकते हैं कई बड़े मायने
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं थी, बल्कि इसके पीछे कोई बड़ा रणनीतिक संकेत हो सकता है। निशांत कुमार की बढ़ती सक्रियता और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से उनकी नजदीकियां इस बात की ओर इशारा कर रही हैं कि जेडीयू आने वाले समय में नेतृत्व को लेकर कोई बड़ा फैसला ले सकती है।