बिहार चुनाव हार पर कांग्रेस की समीक्षा बैठक में हंगामा, मधुबनी में कार्यकर्ताओं के बीच जमकर मारपीट

डिजिटल डेस्क- बिहार विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद कांग्रेस के भीतर मंथन का दौर चल रहा है, लेकिन मधुबनी में आयोजित समीक्षा बैठक मंथन से ज्यादा मारपीट के कारण सुर्खियों में आ गई। मधुबनी जिला कांग्रेस कार्यालय में हुई इस बैठक के दौरान पार्टी कार्यकर्ता आपस में ही भिड़ गए, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हैरानी की बात यह रही कि यह पूरा घटनाक्रम बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम और पार्टी के वरिष्ठ नेता शकील अहमद खान की मौजूदगी में हुआ, जिसके बाद प्रदेशभर में इसकी चर्चा तेज हो गई है। दरअसल, मधुबनी जिले में हाल ही में संपन्न बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था। इसी हार की समीक्षा और भविष्य की रणनीति तय करने के लिए जिला कांग्रेस कार्यालय में बैठक बुलाई गई थी। बैठक शुरू होते ही संगठन की कमजोरियों और चुनावी रणनीति को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। शुरुआत में यह बहस केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रही, लेकिन देखते ही देखते कहासुनी हाथापाई में बदल गई।

पहले धक्का-मुक्की, फिर चले लात-घूंसे, देखते ही देखते चलने लगी लाठियां

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ ही मिनटों में स्थिति इतनी बिगड़ गई कि दो गुट आमने-सामने आ गए। पहले धक्का-मुक्की हुई, फिर लात-घूंसे चलने लगे और बाद में लाठी-बाजी तक नौबत पहुंच गई। अचानक हुए इस हंगामे से बैठक स्थल पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। कई कार्यकर्ता जान बचाने के लिए बाहर की ओर भागते नजर आए। इस दौरान कांग्रेस कार्यालय में कुर्सियां और अन्य सामान भी इधर-उधर बिखर गए। हार की जिम्मेदारी तय करने को लेकर दोनों गुटों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि किसी की बात सुनने को कोई तैयार नहीं था। एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए कार्यकर्ता आपा खो बैठे। बताया जा रहा है कि जिसके हाथ में जो भी सामान आया, उसी से सामने वाले पर हमला किया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस की आंतरिक कलह को सार्वजनिक रूप से उजागर कर दिया।

घटना के बाद स्थगित हुई बैठक

स्थिति बिगड़ते देख प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम और वरिष्ठ नेता शकील अहमद खान ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराने की कोशिश की। दोनों नेताओं ने कार्यकर्ताओं से संयम बरतने और बातचीत के जरिए मुद्दों को सुलझाने की अपील की, लेकिन तब तक हालात बेकाबू हो चुके थे। काफी मशक्कत के बाद बैठक को स्थगित करना पड़ा और किसी तरह स्थिति पर काबू पाया गया। इस घटना के बाद प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने अपने ही कार्यकर्ताओं के इस व्यवहार पर गहरी नाराजगी जताई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस तरह की घटनाएं न सिर्फ संगठन की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि जनता के बीच गलत संदेश भी देती हैं। हालांकि, इस पूरे मामले पर कांग्रेस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

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