डिजिटल डेस्क- 26 जनवरी को दिल्ली के कर्तव्य पथ पर जब गणतंत्र दिवस की भव्य परेड शुरू होगी, तो दर्शकों की निगाहें इस बार ‘बिहार’ की झांकी को तलाशेंगी, लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगेगी। वर्ष 2025 में नालंदा की गौरवशाली विरासत और बुद्ध की भूमि को भव्य अंदाज में प्रस्तुत कर शानदार वापसी करने वाला बिहार इस बार परेड से बाहर रहेगा। इसकी वजह रक्षा मंत्रालय द्वारा लागू की गई नई ‘रोटेशन पॉलिसी’ है, जिसके तहत राज्यों को बारी-बारी से झांकी का मौका दिया जा रहा है। सूचना विभाग के अनुसार, बिहार को चूंकि पिछले साल गणतंत्र दिवस परेड में झांकी प्रस्तुत करने का अवसर मिल चुका था, इसलिए इस बार उसे रोटेशन नीति के तहत ‘वेटिंग लिस्ट’ में रखा गया है। यही नहीं, इस बार दिल्ली की झांकी भी परेड में नजर नहीं आएगी। बताया जा रहा है कि दिल्ली सरकार की ओर से रक्षा मंत्रालय को झांकी का कोई प्रस्ताव ही नहीं भेजा गया था।
रोटेशन पॉलिसी से बदला परेड का स्वरूप
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच झांकी चयन को लेकर हर साल होने वाले विवादों को खत्म करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने नई नीति लागू की है। इसके अनुसार, हर राज्य को तीन साल के भीतर कम से कम एक बार झांकी प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। इस साल गणतंत्र दिवस परेड में कुल 30 झांकियां शामिल होंगी, जिनका मुख्य विषय ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ रखा गया है।
इन राज्यों की झांकियां होंगी शामिल
इस वर्ष परेड में असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, केरल, महाराष्ट्र, मणिपुर, नगालैंड, ओडिशा, पुडुचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और पंजाब की झांकियां शामिल होंगी।
इसके साथ ही भारतीय वायु सेना, नौसेना, सैन्य मामलों का विभाग, संस्कृति मंत्रालय, आयुष मंत्रालय, गृह मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय, विद्युत मंत्रालय और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की झांकियां भी परेड की शोभा बढ़ाएंगी। इस साल की परेड की सबसे खास बात यह होगी कि इतिहास में पहली बार भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की झांकी कर्तव्य पथ पर नजर आएगी। सिनेमा की इस भव्य प्रस्तुति का प्रतिनिधित्व मशहूर फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली करेंगे। वहीं, ऑस्कर विजेता संगीतकार एमएम कीरावनी ‘वंदे मातरम्’ की नई धुन पेश करेंगे, जो परेड को एक नया सांस्कृतिक आयाम देगी।
यादों में बसी है ‘नालंदा’ की झांकी
बिहार की 2025 की झांकी आज भी लोगों के जेहन में ताजा है, जिसमें प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय, बुद्ध की भूमि और घोड़ा कटोरा झील को सिनेमाई भव्यता के साथ प्रस्तुत किया गया था। उस झांकी ने बिहार की सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को वैश्विक मंच पर मजबूती से रखा था।
हालांकि इस साल बिहार की झांकी नहीं दिखेगी, लेकिन राज्य सरकार की तैयारियां भविष्य के लिए जारी हैं। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले वर्षों में बिहार फिर से कर्तव्य पथ पर अपनी संस्कृति और विरासत का भव्य प्रदर्शन करेगा।