डिजिटल डेस्क- बिहार में घरेलू गैस सिलेंडर की लगातार कमी ने आम लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। इसी बीच राज्य सरकार ने राहत देने के लिए एक अहम फैसला लिया है। अब शादी-विवाह जैसे बड़े आयोजनों के लिए कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की विशेष व्यवस्था की जाएगी। इसके तहत लोगों को सीधे गैस एजेंसी से सिलेंडर लेने के बजाय संबंधित एसडीओ (उप मंडल अधिकारी) कार्यालय में आवेदन करना होगा। विशेष सचिव उपेंद्र कुमार ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों और तेल कंपनियों के महाप्रबंधकों को निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत आवेदक को शादी का निमंत्रण पत्र, कार्यक्रम में शामिल होने वाले मेहमानों की अनुमानित संख्या और आवश्यक गैस सिलेंडरों की जानकारी के साथ आवेदन देना होगा। आवेदन मिलने के बाद विभाग उसकी समीक्षा करेगा और सात दिनों के भीतर संबंधित गैस एजेंसी को सिलेंडर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए जाएंगे।
पटना में 1.58 लाख उपभोक्ताओं की बुकिंग पेंडिंग
सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब राज्य में घरेलू गैस सिलेंडर की भारी किल्लत बनी हुई है। केवल पटना जिले की बात करें तो यहां करीब 1.58 लाख उपभोक्ताओं की बुकिंग लंबित है और उन्हें समय पर गैस नहीं मिल पा रही है। गुरुवार को ही 47 लोगों ने जिला कंट्रोल रूम में शिकायत दर्ज कराई। जिले में 136 गैस एजेंसियों के जरिए करीब 16.65 लाख उपभोक्ताओं को सिलेंडर वितरित किया जाता है, लेकिन मौजूदा स्थिति में आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल घरेलू गैस के नए कनेक्शन पर भी रोक लगा दी गई है। इससे नए उपभोक्ताओं को और अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कैटरर्स को कराना होगा रजिस्ट्रेशन
इसी के साथ सरकार ने वैवाहिक आयोजनों में काम करने वाले रसोइयों और कैटरर्स के लिए भी नई व्यवस्था लागू की है। अब उन्हें कॉमर्शियल गैस सिलेंडर लेने के लिए अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। तेल कंपनियां अगले 5 से 7 दिनों के भीतर यह रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू करेंगी, जिससे शादी के सीजन में गैस की सप्लाई सुचारु रूप से सुनिश्चित की जा सके। हालांकि, सरकार की एक और योजना भी जमीनी स्तर पर असरदार साबित नहीं हो रही है। छात्रों और मजदूरों को राहत देने के लिए शुरू की गई 5 किलो वाले छोटे गैस सिलेंडर की योजना एजेंसियों की उदासीनता के कारण ठप पड़ती दिख रही है। कई एजेंसियां इस छोटे सिलेंडर का कनेक्शन देने में रुचि नहीं दिखा रही हैं, जिससे जरूरतमंद लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।