साधु संत को नहीं भाया, शंकराचार्य को ठुकराया !

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, संगम नगरी में चल रहे माघ मेले में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को प्रशासन ने रथ पर जाकर संगम स्नान करने से रोक दिया है. इसके बाद नाराज शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती अपने शिविर के ही बाहर धरने पर बैठ गए. उन्होंने कहा कि जब तक प्रशासन सह सम्मान स्नान के लिए नहीं ले जाता स्नान नहीं करूंगा. बता दें कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने अनुयायियों के साथ रथ पर सवार होकर संगम नोज तक जाना चाहते थे, जबकि प्रशासन उनसे पैदल जाकर स्नान करने को कह रहा था.मेला प्रशासन ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेले में पालकी रथ पर सवार होकर मौनी अमावस्या स्नान जाने से रोक दिया था. उन पर 200 अनुयायियों के साथ संगम नोज तक बिना अनुमति के पालकी पर सवार होकर संगम तक जाते समय बैरिकेडिंग तोड़ने का भी आरोप लगा था. शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई घटना की आवाज अब देवभूमि उत्तराखंड में भी गूंज ने लगी है. चार धाम के तीर्थ पुरोहितो सहित हरिद्वार के कई बड़े साधु संतों ने अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई घटना पर गहरा शोक जताया और विरोध भी किया, साधु संतों का यही आरोप है सनातन धर्म को बढ़ावा देने वाली सरकार ही उनके साथ इस तरीके का व्यवहार कर रही है. तो यह अपमानजनक है, जिसका विरोध कड़े शब्दों में देवभूमि के तीर्थ पुरोहितों ने भी किया वहीं अब इस पूरे मामले पर विपक्षी दलों ने भी साधु संतों के अपमान को लेकर भाजपा पर हल्ला बोला है.

उत्तर प्रदेश में हुई शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती व उनके शिष्यों के साथ हुई अभद्रता को लेकर कड़ा विरोध अब देवनागरी उत्तराखंड में भी देखने को मिल रहा है. यही वजह है कि चार धाम तीर्थ पुरोहितों ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकार की तानाशाही और गैर जिम्मेदार रवैए का गंभीर आरोप लगाया है. जिसके चलते चार धाम सहित देवभूमि के मुख्य द्वार हरिद्वार पर साधु संतों का विरोध प्रदर्शन देखने को मिला है. वही शंकराचार्य पर रथ पर विराजमान होकर स्नान करने को लेकर भी मुकुंदानंद गिरि महाराज ने बताया कि पिछले 39 सालों से वह इसी परंपरा का निर्वहन करते हुए मौनी अमावस्या का स्नान करते रहे हैं. शंकराचार्य होने के बाद गरिमा के अनुरूप उन्होंने पालकी पर सवार होकर संगम स्नान करना था. वही लगातार शंकराचार्य ना मानने के आरोप को भी चार धाम महा पंचायत के पुरोहितों ने पूरा व्याख्यान कर बताया।

 शंकराचार्य अपने माघ मेला के सेक्टर चार स्थित शिविर के बाहर की अनुयायियों के साथ पिछले तीन दिनों से पालकी पर ही बैठे हैं.लगातार कड़े शब्दों में हुए साधु संतों के अपमान को लेकर विरोध कर रहे हैं. तो लगातार इस पर अब राजनीति भी शुरू हो चुकी है. एक तरफ भाजपा ने शंकराचार्य के साथ हुई अभद्रता और अपमान को गलत अफवाह फैलाने की बात की है. भाजपा का मानना है कि लॉ इन आर्डर को बरकरार रखने के लिए इसका पालन करना भी बेहद जरूरी है. लेकिन शंकराचार्य के साथ कोई अभद्रता प्रशासन या सरकार द्वारा नहीं की गई है.साथ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर अपमान को लेकर कांग्रेस भी साधु संतों और शंकराचार्य के साथ खड़ी हो चुकी है. कांग्रेस का मानना है कि भाजपा एक तरफ सनातन धर्म की बात करती है, तो वही साधु संतों का अपमान भी करती है, अगर शंकराचार्य जैसे व्यक्ति गंगा स्नान नहीं करेंगे तो भला कौन करेगा। 

गौर करें तो शंकराचार्य द्वारा रविवार को प्रेस कांफ्रेंस में कहा गया था कि उनके शिष्यों व संतो के साथ मारपीट की गई, उनको घसीटा गया, अपमानित किया गया. अधिकारियों ने सादी वर्दी में खुद कोहनी से साधुओं को मारा. इनमें कई बाल ब्रह्मचारी साधु भी थे. इसके बाद शंकराचार्य अपने माघ मेला के सेक्टर चार स्थित शिविर के बाहर की अनुयायियों के साथ पिछले तीन दिनों से पालकी पर ही बैठे हैं. उनका कहना है कि मैं धरना नहीं दे रहा हूं. मैं पुलिस अभिरक्षा में हूं. पुलिसकर्मी ही मौनी अमावस्या स्नान नहीं करने दिए और पालकी घसीट कर शिवर तक लेकर आए. यही छोड़कर गए हैं. मैं यहां तब तक रहूंगा, जब तक ससम्मान प्रशासन मुझे पालकी के साथ स्नान करने की अनुमति नहीं दे देता.बरहाल संतो के अपमान की आग अब उत्तर प्रदेश से लेकर देवभूमि उत्तराखंड तक पहुंच चुकी है.ऐसे में सरकार प्रशासन शंकराचार्य को मनाने में कामयाब नहीं होता तो शायद ये आंदोलन अभी रुकने वाला नहीं। 

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