वन भूमि की नपाई,पथराव तक आई ! 

उत्तराखंड डेस्क रिपोट, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ऋषिकेश के आसपास के इलाकों में वन भूमि चिन्हीकरण की कार्रवाई को लेकर लोग काफी आशंकित और खौफ में हैं. लिहाजा, लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. इसी कड़ी में सैकड़ों लोग सड़क छोड़ रेलवे ट्रैक पर बैठ गए हैं. जिससे मामला गरमा गया है. उधर, शिवाजी नगर में बैठक आहूत की गई. जिसमें पार्षद के नेतृत्व में कई लोग शामिल हुए. बैठक में लोगों ने वन विभाग की कार्रवाई को लेकर अपने-अपने विचार रखे.मनसा देवी रेलवे फाटक के पास ट्रैक पर जमे लोग दरअसल, वन विभाग की कब्जे वाली भूमि हाथ से जाते देख लोगों में गुस्सा देखने को मिल रहा है.आक्रोशित लोगों ने सड़क तो छोड़ अब रेल मार्ग को भी जाम करना शुरू कर दिया है.मनसा देवी रेलवे फाटक पर सैकड़ों की संख्या में लोग एकत्रित होकर ट्रैक पर बैठ गए हैं, जिसमें महिलाएं सबसे ज्यादा शामिल हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि जान जाए पर भूमि हाथ से न जाए.दरअसल, मामला ऋषिकेश क्षेत्र की करीब 2866 एकड़ भूमि से जुड़ा है, जिसे 26 मई 1950 को 99 वर्षों की लीज पर पशु लोक सेवा मंडल संस्थान को दिया गया था. इस लीज की अवधि वर्ष 2049 तक निर्धारित है.सबसे बड़ी अदालत ने कहा कि उत्तराखंड सरकार और उसके अधिकारी जंगल की जमीन पर कब्जे को लेकर “मूक दर्शक” बने बैठे हैं. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने खुद ही संज्ञान लेते हुए केस शुरू किया.जिसको लेकर विपक्षी दलों ने भी सरकार पर वन भूमि पर भूमाफिया कर करने का गंभीर आरोप लगाया है. पुलिस पर पथराव झड़प के बाद जानकारी के अनुसार NH जाम और पथराव करने पर 16 नामजद समेत 200 से ज्यादा लोगों पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है,ऋषिकेश स्थित वन विभाग की भूमि पर अतिक्रमण हटाने के लिए गई पुलिस, वन विभाग एवं प्रशासन की संयुक्त टीमों पर उपद्रवियों द्वारा आमजन को उकसाकर पत्थरबाजी की घटना को अजांम दिया गया, ऐसे उकसाने वालो को चिन्हित किया जा रहा है, साथ ही ऐसे उपद्रवीयों को भी चिन्हित किया जा रहा है, जिनके द्वारा पत्थरबाजी की गई,पुलिस ने साफ किया है अगर कोई भी सरकारी काम में बाधा उत्पन करता है तो सख्त कारवाही की जायेगी।

  

देव नगरी ऋषिकेश क्षेत्र की करीब 2866 एकड़ भूमि से जुड़ा है, जिसे 26 मई 1950 को 99 वर्षों की लीज पर पशु लोक सेवा मंडल संस्थान को दिया गया था. इस लीज की अवधि वर्ष 2049 तक निर्धारित है.आपको बता दे, उत्तराखंड में वन भूमि पर हो रहे अतिक्रमण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार और अधिकारियों पर टिप्पणी की थी. सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती के बाद राज्य सरकार एक्टिव हुई और इस तरह के मामलों की जांच के लिए कमेटी का गठन किया. खास बात यह है कि इस समिति को 15 दिन का वक्त दिया है,5 जनवरी को जवाब दाखिल करना है. जिसमें कमेटी को सभी रिकॉर्ड खंगालते हुए इस भूमि की धरातल पर स्थित और रिकॉर्ड्स के आधार पर रिपोर्ट तैयार करनी होगी.वन  विभाग की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई से नाराज लोग सड़क छोड़ रेलवे ट्रैक पर जान देने के लिए बैठ गए. इस दौरान पुलिस के साथ प्रशासन की टीम ने लोगों को समझाने का प्रयास किया. स्थिति तनावपूर्ण हुई तो मौके पर जीआरपी की टीम भी पहुंची. इस दौरान संदिग्ध परिस्थितियों में भीड़ से किसी ने पुलिस पर पत्थर फेंक दिया और देखते ही देखते पथराव होने से स्थिति गंभीर हो गई.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश के बाद वन विभाग की कार्यवाही तेजी से अमल में लाई जा रही है भारी फोर्स के साथ  उपजिलाधिकारी सहित वन विभाग के अधिकारी ऋषिकेश पशुलोक सेवा समिति की खाली भूमि को चिन्हित कर अपने कब्जे में ले रहा है बीते दो दिनों से वन विभाग द्वारा यह कार्यवाही की जा रही है वही स्थानीय लोगों में वन विभाग द्वारा की जा रही कार्यवाही को लेकर काफी आक्रोश है स्थानीय लोग काफी डरे हुए हैं. जिसको लेकर अब प्रदेश में राजनीति भी अपने चरम पर है.ऐसे में सत्ता पक्ष सुप्रीम कोर्ट का हवाला देता नजर आ रहा है, तो विपक्षी दल सरकार और सिस्टम की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े करता नजर आ रहा है.साथ ही ऋषिकेश में लगातार कांग्रेस के नेताओं के दौरे ने ऋषिकेश में माहौल गर्म कर दिया है, पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत और प्रीतम सिंह ने आज पत्रकार वार्ता कर इस वन भूमि प्रकरण को अंकिता हत्याकांड से ध्यान हटाने का काम बताया और अंकिता भंडारी मामले में अब बीजेपी से ही सार्वजनिक रूप में आवाज उठ ने की बात कहीं है।

बता दें कि एक जनहित याचिका की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने वन विभाग की खाली पड़ी भूमि का सर्वे कर उन्हें कब्जे में लेने के आदेश वन विभाग और जिला कलेक्टर को जारी किए हैं. इसी कड़ी में वन विभाग की कार्रवाई खाली पड़ी वन भूमि पर चल रही है, जिसका लोग विरोध कर रहे हैं. उत्तराखंड शासन ने इस पूरे मामले की जांच के लिए औपचारिक रूप से समिति का गठन किया है. शासन से गठित इस पांच सदस्यीय समिति की अध्यक्षता मुख्य वन संरक्षक (गढ़वाल) धीरज पांडे को सौंपी गई है. समिति में सीएफ शिवालिक, देहरादून डीएफओ, एडीएम (वित्त) और ऋषिकेश एसडीएम को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है. लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद से ऋषिकेश में तनाव की स्थिति पैदा हो चुकी है, जो प्रशासन के लिए भी बड़ी चूनौती है. ऋषिकेश संवाददाता बसंत कश्यप के साथ, 

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