उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की तरफ से अंकिता भंडारी हत्याकांड पर केंद्र सरकार को सीबीआई जांच की संस्तुति दी गई लेकिन अभी तक सरकार द्वारा इसके आगे की कार्रवाई की कोई जानकारी नहीं दी गई जिस पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार पर नाराज़गी जताई। गणेश गोदियाल ने देहरादून के कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में प्रेस वार्ता कर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सीबीआई जांच की संस्तुति दिए 12 दिनों का समय हो गया है लेकिन अभी तक मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक तौर पर नहीं बताया कि उन्होंने जांच के आदेश दिए या नहीं और अगर जांच के आदेश दिए गए हैं तो उसमें किन बिंदुओं को शामिल किया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जानबूझकर इस जांच को असमंजस में फंसाना चाह रहे हैं क्योंकि वो अपराधियों को बचाना चाहते हैं। वहीं गणेश गोदियाल का कहना है कि सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले पर जब हमने डीजीपी दीपम सेठ से मुलाकात की तो उन्होंने बताया कि हमने इस मामले पर एक प्राइमरी जांच कमेटी बनाई है और वो 7 दिनों के अंदर हमें रिपोर्ट सौंपेगी लेकिन उसे भी समय हो गया है. वहीं काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले पर भी गणेश गोदियाल ने सरकार को घेरा.दूसरी और भाजपा के विधायक के जमीन प्रकरण पर अवैध कब्जे पर पार्टी में भीतर घात को लेकर भी भाजपा से कही सवाल पूछे।जिससे कांग्रेस के इन सवालो पर एक बार फिर वार पलटवार शुरू हो गया है.वही भाजपा आने वाले समय यानी कि मिशन 2047 का एजेंडा बनाए हुए है.ऐसे में विपक्ष के सवाल सत्ता दल को घेरे है.
उत्तराखंड में सर्द मौसम के साथ राजनीति के आरोप प्रत्यारोप से माहौल बेहद गर्म है.शुक्रवार को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई (सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन) जांच पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में लगातार प्रदेश सरकार और खुद मुख्यमंत्री जांच को भटकाने का काम कर रहे हैं. गणेश गोदियाल का कहना है कि कांग्रेस का यह आरोप आज भी स्टैंड करता है. गणेश गोदियाल का आरोप है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले पर जनता के आक्रोश को देखते सरकार ने आनन-फानन में सीबीआई जांच की आधी-अधूरी घोषणा तो कर दी, लेकिन इस घोषणा का हश्र भी पेपर लीक मामले में सीबीआई जांच की घोषणा जैसा हो रहा है. इन दोनों मामलों में सीबीआई की तरफ से अभी तक कोई बयान आया है या नहीं, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है.वही किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या प्रकरण और अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच कराये जाने के लिए राज्य सरकार की नीयत साफ नहीं है. इसलिए धामी सरकार जांच में पहले दिन से ही लीपापोती करती आई है. उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं की जाती है तो अंकिता को न्याय दिलाने के लिए फिर से आंदोलन शुरू किया जाएगा.
कांग्रेस ने सरकार पर सवाल उठाया कि क्या भाजपा के तथाकथित बड़े नेता इस तरह जमीनों को कब्जा करने में लगे हुए हैं. अगर ऐसी स्थिति है, तो फिर क्या भाजपा के नेता वहां ढांढस बंधाने जा रहे थे. वहीं अगर वो बाद में भाजपा के नेता अरविंद पांडे के घर नहीं गए, इसका मतलब भाजपा के भीतर क्या-क्या खिचड़ियां पक रही है. प्रदेश की जनता यह सब जानना चाहती है.
प्रदेश में 2027 में होने जा रहे विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी दल अब सरकार पर कानून व्यवस्था और जन मुद्दों को लेकर सत्ता दल भाजपा को अभी से घेरने में जुट गए है.विपक्ष को लगता है. ये मुद्दे आने वाले समय पर जीत के लिए रामबाण साबित हो सकते है. वही भाजपा भी अपनी रणनीति तय करने में जुटी है. लेकिन कही न कही ये विपक्ष के सवाल भाजपा को घेरे है.पार्टी में भले सब कुछ ठीक कहने का दावा करने वाली सत्ता रुड भाजपा पार्टी कही न कही इन विपक्ष के सवालों से जरूर घिरी दिखाई दे रही है.ऐसे में क्या विपक्ष अपनी अपनाई रणनीति से भाजपा को इस दंगल में चित कर पाएगा यह देखना अभी बाकी है।