नए जिलों की मांग, महिलाओं को सम्मान !

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. केंद्र सरकार महिला आरक्षण कानून को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी में है. चर्चा है कि आगामी संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण से जुड़े कानून में संशोधन लाया जा सकता है. ताकि, संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने की दिशा में प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके. इस संभावित कदम को लेकर न केवल सत्तारूढ़ दल बल्कि, विपक्षी दलों से जुड़ी महिला नेताओं की भी सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आ रही है.आपको बता दे, केंद्र सरकार 16, 17 और 18 अप्रैल को तीन दिवसीय संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है.राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा है, कि इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधित अधिनियम को लाया जा सकता है.अगर ऐसा होता है तो यह महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी के लिहाज से एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जाएगा. देशभर की तरह उत्तराखंड की महिला नेताओं की भी नजर अब इस विशेष सत्र पर टिकी हुई है. जिस पर तमाम दलों की महिलाओं ने इस कदम को स्वागत योग्य बताया है.इसके साथ ही प्रदेश में एक नया विवाद भी खड़ा हो गया है,अब महिला आरक्षण के चलते सीटों के बढ़ने की बात कही जा रही है,वही दूसरी और विधानसभा परिसीमन से पहले उत्तराखंड में नए जिलों की मांग ने फिर जोर पकड़ लिया है। जिला बनाओ संघर्ष समिति ने प्रदेश में एक साथ 11 नए जिले बनाने की मांग उठाई है। उत्तराखंड राज्य में नए जिलों के गठन की मांग को लेकर जिला बनाओ संघर्ष समिति उत्तराखंड ने अपनी आवाज बुलंद कर दी है. समिति के पदाधिकारियों ने चेताया कि अगर उनकी मांग पूरी नहीं होती है तो उन्हें आंदोलन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा.जिसके चलते बढ़ती ये मांगे आने वाले चुनाव से पहले सरकार की टेंशन को भी बड़ा सकती है. जिस पर राजनीति बेहद तेज है।

महिलाओं को राजनीति में सम्मानजनक हिस्सेदारी देने के लिए मोदी सरकार 2023 में लाए गए कानून को संशोधित करने जा रही है. खास बात ये है कि देशभर की तरह उत्तराखंड में भी महिलाओं की नजर अब आगामी संसद के विशेष सत्र पर है, जहां महिला आरक्षण को लेकर नए संशोधित कानून के आने की उम्मीद है.देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. केंद्र सरकार महिला आरक्षण कानून को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी में है. चर्चा है कि आगामी संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण से जुड़े कानून में संशोधन किया जा सकता है.

महिलाओ को आरक्षण की मांग अभी खत्म भी नहीं हुई,एक और विवाद सरकार की परेशानी चुनाव से पहले बढ़ा सकता है.उत्तराखंड के प्रत्येक जनपद के विभिन्न क्षेत्रों को नए जिलों के रूप में गठित करने की मांग को लेकर प्रकाश कुमार डबराल ने कहा कि उत्तराखंड में नए जिले न बनने के कारण ढेर सारी समस्याएं खड़ी हो गई हैं. इन्हीं समस्याओं का समाधान करने के लिए ही ग्यारह और नए जिले बनने चाहिए और सरकार को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना होगा .उन्होंने कहा कि इसके लिए एक अभियान तेजी के साथ चलाया जाएगा. समिति के अनुसार, राज्य के कई दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में आज भी विकास कार्यों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पा रहा है. प्रशासनिक दूरी और संसाधनों के असमान वितरण के कारण आम जनता को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.वही विपक्षी दल भी इस समर्थन के साथ सरकार को चौतरफा घेरने में जुट गए है.और भाजपा सरकार बचाव करती नजर आ रही है.

भारत सरकार विशेष सत्र के जरिए महिला आरक्षण विधेयक को अंतिम रूप दे सकती है. दरअसल, इसमें परिसीमन प्रक्रिया को अपनाया जाना है, परिसीमन जनसंख्या के आधार पर किया जाता है. लिहाजा, राज्यों में मौजूद जनसंख्या के आधार पर सीटों को तय किया जाएगा.फिलहाल, जनसंख्या 2011 की जनगणना के आधार पर मानी जानी है, इसके पीछे की वजह ये है कि हर 10 साल में होने वाली जनगणना साल 2021 में नहीं हो पाई थी, ऐसे में परिसीमन का आधार जनगणना 2011 को ही रखा जाएगा. इसके आधार पर उत्तराखंड में विधानसभा की सीटें 105 तक बढ़ने की उम्मीद है. जबकि, फिलहाल राज्य में 70 विधानसभा सीटें हैं. साथ ही यदि नए जिलों का गठन किया जाता है, तो इससे न केवल प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और न्याय जैसी सुविधाएं भी आम जनता तक आसानी से पहुंच सकेगी. और स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और क्षेत्रीय पहचान को भी बढ़ावा मिलेगा. प्रस्तावित नए जिलों में उत्तरकाशी से पुरोला, नौगांव, मोरी क्षेत्र, टिहरी से नरेंद्र नगर,प्रतापनगर; पौड़ी से कोटद्वार,बीरोंखाल; चमोली जनपद से गैरसैंण, नैनीताल से हल्द्वानी,रामनगर के साथ ही हरिद्वार से रुड़की, देहरादून जिले से विकासनगर,चकराता, अल्मोड़ा से रानीखेत, पिथौरागढ़ से डीडीहाट तथा उधमसिंह नगर से काशीपुर,गदरपुर, बाजपुर क्षेत्र शामिल हैं. यदि इन मांगों पर भविष्य में कोई निर्णय होता है.और नए जिलों का गठन किया जाता है. तो युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर मिलेंगे और महिलाओं का सशक्तिकरण भी होगा.

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