चारधाम तैयारी जारी,विपक्ष पड़ रहा भारी !

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट , प्रदेश उत्तराखंड की विश्वविख्यात चारधाम यात्रा 2026 को लेकर अभी से तैयारियां प्रारम्भ हो चुकी है. हर वर्ष चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालुओं व तीर्थयात्रीयो की संख्या राज्य में पहुँचती है, जो राज्य के राजस्व को बढ़ाने के लिए अहम भूमिका भी निभाती है. केवल यही नही बल्कि होमस्टे, खानपान, पर्यटन के साथ स्थानीय लोगों की आजीविका का भी यह चारधाम यात्रा एक बड़ा आधार है. जिससे चारधाम यात्रा को राज्य अर्थव्यवस्था की रीड की हड्डी भी कहा जाता है. यही कारण है की हर वर्ष होने वाली इस चारधाम यात्रा में किसी भी प्रकार से तीर्थयात्रियों को कोई असुविधा न हो उसके लिए राज्य सरकार कार्ययोजना बना यात्रा को सुगम बनाने की दृष्टि से लगातार कार्य करती रहती है.इस बार यात्रा के दौरान सुरक्षा, पैदल मार्ग, हवाई मार्ग, ठहरने, खाने-पीने व तमाम उपयोगिता में किसी भी प्रकार से कोई कमी न रहे यह राज्य सरकार की प्राथमिकता है. वही एक बार फिर 2026 चारधाम यात्रा के लिए प्रबंध होने शुरू हो गये है. तमाम बैठके की जा रही है और शासन प्रशासन अभी से ही कमर कसने में लगते हुए नज़र आ रहे है. सरकार का दावा है की हर वर्ष रिकॉर्ड तोड़ती चारधाम यात्रा इस वर्ष भी नया रिकॉर्ड बनाती हुई नज़र आएगी.साथ ही आज बसंत पंचमी के शुभ मुहूर्त पर टिहरी नरेश ने चारों धामों में एक प्रसिद्ध धाम बद्रीनाथ के कपाट खुलने की तिथि 23 अप्रैल प्रांत 6.15 पर खुलने की घोषित कर दी है. तो वही दूसरी ओर विपक्ष अभी भी यात्रा के दौरान होने वाली असुविधाओं का बिगुल बजाता नज़र आ रहा है. विपक्ष का मानना है कि सरकार के दावे केवल बैठको और कागज़ो तक ही सिमित है. जिसका धरातल से कोई लेना देना नहीं है. हालांकि इस वर्ष चारधाम यात्रा को प्रारम्भ करने की पारंपरिक तिथियां घोषित नहीं हुई है. लेकिन यात्रा को बेहतर से बेहतर बनाने के लिए व और अधिक श्रद्धालुओं को यात्रा से जोड़ने के लिए सरकार प्रयासरत है. बरहाल यह तो देखने वाली बात होगी की आगामी चारधाम यात्रा में इस वर्ष किस प्रकार सरकार की कार्ययोजना धरातल पर दिखाई देती है. लेकिन विपक्ष के सवाल और राजनीतिक तीर यात्रा के शुरू होने से पहले ही चलने शुरु हो गये है.

उत्तराखंड के लिए चारधाम यात्रा न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह राज्य की अर्थव्यवस्था और पहचान का भी एक अहम आधार है. हर साल लाखों श्रद्धालु यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के दर्शन के लिए प्रदेश पहुंचते हैं. परंपरा के अनुसार चारों धामों के कपाट आमतौर पर अप्रैल के अंतिम सप्ताह या मई के पहले पखवाड़े में खुलते हैं. भले ही इस वर्ष अभी कपाट खुलने की आधिकारिक तिथियां सर्वप्रथम बद्रीनाथ की घोषणा टिहरी नरेश ने कर दी हो,लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने यात्रा की तैयारियां अभी से शुरू कर दी है.चार धाम यात्रा को लेकर पहली उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई है. यह बैठक ऋषिकेश में आहूत की गई, जिसमें यात्रा से जुड़े सभी प्रमुख जिलों के जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे. इस बैठक में दो अहम बिंदुओं पर विशेष रूप से फोकस किया जाएगा. पहला पिछली यात्रा के दौरान आए अनुभवों के आधार पर समीक्षा और सुधार की जरूरतों पर चर्चा की गई. पिछली यात्रा में किन व्यवस्थाओं ने अच्छा काम किया और किन क्षेत्रों में कमियां रहीं, इस पर विस्तार से मंथन किया गया ताकि आगामी यात्रा को और बेहतर बनाया जा सके.आपको बता दे पिछले वर्ष प्रदेश में आयी तमाम प्राकृतिक आपदाओं के कारण आयी मुश्किलों के बाद भी चारधाम यात्रा गतिमान रही.आकड़ो की बात करे तो 51 लाख से ज़्यादा श्रद्धालु वर्ष 2025 में चारधाम यात्रा का हिस्सा बने थें जो अपने आप में नया रिकॉर्ड था, जिसमें केदारनाथ में 17.68 लाख, बद्रीनाथ में 16.60 लाख, गंगोत्री में 7.57 लाख और यमुनोत्री में 6.44 लाख श्रद्धालु शामिल थे. 

एक तरफ चारधाम यात्रा में धामी सरकार के आने के बाद से लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है, बढ़ोतरी के साथ-साथ हर साल चार धाम यात्रा में कई कमियां खामियां भी विपक्ष गिनता  नजर आ रहा है. विपक्ष का मानना है की कागजी कार्रवाई पर सरकार हमेशा चलती है. लेकिन जब भी चार धाम यात्रा शुरू होती है. तो यात्रियों को स्वास्थ्य,सड़क और रहने की समस्या जैसी तमाम अन्य असुविधाओं से दो-चार होना पड़ता है. वहीं भाजपा का दावा है, सरकार इस बार पहले से ही तैयारी और बेहतर करने की कोशिश कर रही है. और इस बार उम्मीद जताई जा रही है. कि 2026 की यात्रा अन्य सालों की भांति सभी रिकॉर्ड तोड़ देगी।

  

आपको बता दे,चारधाम यात्रा के दौरान इतनी बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही को सुरक्षित और सुचारू रूप से संचालित करना एक बड़ी चुनौती होता है. इसलिए यदि इस बार भी भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, तो वैकल्पिक व्यवस्थाओं और अतिरिक्त संसाधनों की योजना पर भी विचार किया जाएगा.उत्तराखंड में चारधाम यात्रा को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए हर साल गढ़वाल कमिश्नर की अध्यक्षता में यात्रा से पहले विस्तृत रूपरेखा तैयार की जाती है. इसी कड़ी में यात्रा से पहले होने वाली यह पहली बैठक बेहद अहम मानी गई है, जो आने वाली यात्रा की दिशा और गुणवत्ता तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.आज जिसमे बद्रीनाथ की तिथि घोषित हो गई है,अन्य तीन धाम की यात्रा के लिए वर्ष 2026 में कपाट खुलने की तिथि घोषित जल्द हो जाएगी समय अनुसार, लेकिन तैयारियां अपने जोर पर है। लेकिन यहाँ भी कहा जा सकता है. हर बार की भांति इस बार की यात्रा में कोई कोर कसर न रहे इसी वजह से तैयारी आपने जोरो पर है.  लेकिन कही न कही बिना तैयारी के दावा करने के बाद भी यात्रियों को इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ता है.उम्मीद यही है इस बार सरकार की तैयारिया और दावे अगर सही साबित होते है तो यात्रा 2026 में सभी अकड़े पार करने में कामयाब होगी।

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