घोषणाओं कई हजार,विपक्ष का प्रहार !

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, देवभूमि उत्तरखंड प्रदेश बने 25 साल पुरे हो चुके है.इन बीते सालो में भाजपा सहित कांग्रेस ने राज किया लेकिन विकास के पथ पर चलने की बात को लेकर सभी ने बड़े बड़े दावे और घोषणाएं भी की जिन घोषणाओं को कर तो दिया लेकिन सरकार और नेतत्व परिवर्तन के चलते वो वादे भी जनता की समस्याओ के बदलाव के चलते मझधार में खो से गए.धामी सरकार बने साढ़े चार साल पुरे हो चुके है.और उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की घोषणाओं को लेकर शासन स्तर पर लगातार समीक्षाएं तो हो रही हैं, लेकिन इसके बावजूद जमीनी स्तर पर काम की रफ्तार वैसी नहीं दिख रही है. जैसी अपेक्षा की जा रही है. स्थिति यह है कि एक तरफ मुख्यमंत्री खुद अपनी घोषणाओं को तेजी से पूरा करने के निर्देश दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ साल 2021-22 की घोषणाएं भी अब तक शत-प्रतिशत पूरी नहीं हो पाई हैं. यही नहीं, विधायकों द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों के लिए दिए गए विकास कार्यों के प्रस्ताव भी धीमी गति से आगे बढ़ रहे हैं. सरकारी स्तर पर हुई समीक्षा बैठकों में यह बात सामने आई है. कि साल 2021 की 156 घोषणाएं अब तक फाइलों में ही घूम रही हैं. इसी तरह साल 2022 की 75 घोषणाएं और साल 2023 की 176 घोषणाएं भी अब तक पूरी नहीं हो सकी हैं. इन आंकड़ों ने शासन को भी चिंता में डाल दिया है.खास बात यह है कि इस स्थिति पर खुद प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री ने भी नाराजगी जताई है. और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं. उन्होंने एक महीने के भीतर लंबित घोषणाओं को पूरा करने के आदेश भी जारी किए हैं. इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कई परियोजनाएं ऐसी हैं, जिन पर अभी तक काम शुरू भी नहीं हो पाया है.वही विपक्षी दलों ने धामी सरकार पर हल्ला बोलते कहा है. की उन्हें जमीन पर उतारने के लिए न तो प्रशासनिक इच्छाशक्ति दिखती है. और न ही ठोस प्लानिंग. सरकार सिर्फ आंकड़ों का खेल खेल रही है, जबकि हकीकत यह है कि कई योजनाएं आज भी कागजों में ही अटकी पड़ी है.

प्रदेश में अब तक बात सिर्फ मुख्यमंत्री की घोषणाओं तक ही सीमित नहीं है. धामी सरकार ने प्रदेश के तमाम विधायकों से अपने-अपने क्षेत्रों के लिए जनहित के 10-10 कामों के प्रस्ताव मांगे थे. इन प्रस्तावों के आधार पर राज्य स्तर पर 573 कार्यों को प्राथमिकता में लिया गया. लेकिन इन 573 में से अब तक सिर्फ 222 काम ही पूरे हो सके हैं, यानी इस मामले में सरकारी मशीनरी की परफॉर्मेंस करीब 41.65 प्रतिशत ही दिखाई देती है. बाकी काम या तो अधूरे हैं या फिर प्रक्रिया में ही अटके हुए हैं. इससे यह साफ होता है कि न सिर्फ सीएम की घोषणाएं, बल्कि विधायकों के विकास कार्य भी अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं. कांग्रेस के हमलों के बीच भारतीय जनता पार्टी सरकार के बचाव में उतरती नजर आ रही है.

अब तक की कुल घोषणाओं की बात करें तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने कार्यकाल में करीब 3827 घोषणाएं कर चुके हैं. इनमें से 2315 घोषणाएं पूरी हो चुकी हैं. यानी लगभग 60 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरे किए जा चुके हैं. हालांकि अब भी करीब 1457 घोषणाएं ऐसी हैं, जो पूरी होना बाकी हैं. इन लंबित घोषणाओं में से करीब 520 ऐसी हैं, जिन पर अभी तक कार्य शुरू ही नहीं हो पाया है. यही आंकड़े सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं, क्योंकि चुनावी साल में विपक्ष इन्हीं मुद्दों को लेकर सरकार पर हमलावर है. मुख्यमंत्री की घोषणाओं के लंबित रहने को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस लगातार सरकार पर हमला बोल रही है.

अब आपको बता दे, की शासन स्तर पर घोषणाओं पर अमल करने तेज गति से काम करने के लिए कमर कसी जा रही है. शासन स्तर पर भी यह महसूस किया जा रहा है. कि घोषणाओं को पूरा करने में अनावश्यक देरी हो रही है. इसी वजह से अब जिलाधिकारियों को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं. तय किया गया है कि मुख्यमंत्री की कोई भी घोषणा होने के बाद उसकी जानकारी 72 घंटे के भीतर मुख्यमंत्री के घोषणा अनुभाग को दी जाएगी. इसके अलावा जिलाधिकारी को ही यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे संबंधित विभागों को चिन्हित करें और समय-सीमा तय कर काम शुरू करें. घोषणाओं से जुड़ी फाइलें एक विभाग से दूसरे विभाग में भटकें, इसके लिए भी नई गाइडलाइन बनाई जा रही है.ऐसे में सवाल यह है,की मुख्यमंत्री की घोषणा में लेटलतीफी लगाने वाले नौकरशाहों पर आखिर कैसे लगाम लग पाएगी या ये घोषणाएं सिर्फ जनता के लिए हवा हवाई साबित होगी।

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