उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट , अपने देवत्व के लिए पहचाने जाने वाली देवभूमि उत्तराखंड राज्य में धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक मर्यादाओं की रक्षा को लेकर एक और महत्वपूर्ण कदम उठाये जाने की तैयारी की जा रही है, जिस प्रकार धर्मनगरी हरिद्वार में आगामी 2027 के अर्धकुम्भ से पहले जहाँ गंगा सभा द्वारा कुम्भ क्षेत्र व हर की पौड़ी क्षेत्र के आसपास गैर हिन्दुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग लगातार की जा रही है वही अब गंगा सभा के निर्णयों के बाद चारधाम यात्रा 2026 से पहले बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के अधीन आने वाले मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने पर भी चर्चा की जा रही है, इस संबंध में आगामी बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित किया जाना है जिसकी तैयारियां समिति द्वारा शुरु कर दी गयी है. आपको बता दे मंदिर समिति का मानना है कि उत्तराखंड की आस्था और संस्कृति की रक्षा सर्वोपरि है और मंदिरों की पवित्रता बनाए रखना समिति की प्राथमिक जिम्मेदारी भी है वही जिसके तहत देवभूमि की पवित्रता व परंपराओं की रक्षा और अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी इसके लिए मंदिर समिति प्रभावी कदम उठाने जा रही है. हालांकि यह फैसला लागू नहीं हुआ है लेकिन आगामी बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास करने पर अभी से जोर दिया जा रहा है. बीकेटीसी की आगामी बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा, प्रस्ताव पारित होने के बाद बद्रीनाथ – केदारनाथ समिति के अधीन आने वाले अन्य मंदिरों में नई व्यवस्था लागू की जा सकती है. तो वही दूसरी ओर इस विषय ने एक और राजनितिक मुद्दे को भी जन्म दे दिया है, जहाँ एक ओर राज्य सरकार आगामी चारधाम यात्रा 2026 की तैयारियों के जुट चुकी है और इसी बीच बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति द्वारा यह विषय सामने रखने से चारधाम यात्रा शुरु होने से पहले राजनितिक सरगर्मिया भी तेज़ कर दी है. दूसरी ओर विपक्ष मंदिर समिति के इस फैसले से नाखुश नज़र आ रहा है और जिसके चलते धर्मनिरपेक्षता व संविधान का पाठ भी सरकार को पढ़ाता दिखाई दे रहा है. जिसको लेकर राजनीतिक बयानबाजियां भी शुरू होती दिखाई देने लगी है,
देवभूमि उत्तराखंड 2027 में होने जा रहा अर्धकुंभ मेले से पूर्व धर्मनगरी हरिद्वार में कुंभ मेला क्षेत्र को गैर हिंदू प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किए जाने की मांग उठी है. हिंदूवादी नेता और श्री गंगा सभा के साथ ही अन्य कई तीर्थ पुरोहितों ने यह मांग उठाई है.हरिद्वार में सरकार से कुंभ क्षेत्र को हिंदू क्षेत्र घोषित करने की मांग की गई.वही अब बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने भी चारधाम और उससे जुड़े 48 तीर्थ स्थलों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध का प्रस्ताव रखा है. समिति का कहना है कि ये पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि सनातन धर्म के सर्वोच्च आध्यात्मिक केंद्र हैं. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पर संस्थाओं के मत के अनुसार कार्रवाई की बात कही है. अब इसको उत्तराखंड के चार धामों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित होगा, इसके लिए मंदिर समिति प्रस्ताव तैयार कर रही है। जिसे आने वाले यात्रा सीजन में लागू किया जा सकता है। बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है।
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने एक अहम फैसला लेते हुए सोमवार को घोषणा की, कि गैर-हिंदुओं को बद्रीनाथ-केदारनाथ धाम और उसके कंट्रोल वाले दूसरे मंदिरों में घुसने नहीं दिया जाएगा. यह निर्णय धार्मिक परंपराओं और मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है.वही अब विपक्ष ने भी गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने पर भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए है,
आपको बता दे, इसी बीच बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तारीख भी घोषित कर दी गई है. छह महीने के शीतकालीन अवकाश के बाद बद्रीनाथ मंदिर के कपाट 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे.मंदिर समिति के इस फैसले को लेकर धार्मिक और सामाजिक स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं. कुछ लोग इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे संवैधानिक मूल्यों के नजरिये से देख रहे हैं. हालांकि समिति का कहना है कि यह निर्णय किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि परंपराओं के संरक्षण के लिए लिया गया है.अब सभी की नजरें मंदिर समिति की बोर्ड बैठक पर टिकी हैं, जहां इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगेगी.लेकिन कहीं न कहीं गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने के बयानों को लेकर राजनीति बेहद गर्म हो चली है.