उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू होते ही सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भाजपा जहां संगठन को चुनावी मोड में लाकर लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की तैयारी में जुटी है, वहीं कांग्रेस भी सत्ता में लौटने के लिए अपनी जमीन मजबूत करने में लगी है। लेकिन कांग्रेस की चुनावी तैयारियों के बीच पार्टी के भीतर की खींचतान ही अब चर्चा का केंद्र बन गई है। दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता ने पार्टी के अंदर नए समीकरणों को जन्म दे दिया है। अस्वस्थता के कारण लंबे समय बाद उत्तराखंड लौटे हरीश रावत इन दिनों लगातार जनसंवाद और राजनीतिक कार्यक्रमों के जरिए सक्रिय नजर आ रहे हैं। बीते कई दिनों से उनकी धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा को लेकर सियासी हलचल तेज है। हरीश रावत इसे जनता से सीधा संवाद और कांग्रेस को मजबूत करने की कवायद बता रहे हैं। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उनकी इस यात्रा पर आपत्ति जताई है। कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा ने प्रदेश संगठन के समानांतर कार्यक्रमों को लेकर रावत से यात्रा रोकने को कहा है, जबकि रावत ने अपनी गतिविधियां जारी रखने के संकेत दिए हैं। इसके बाद अब कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें दिल्ली तलब किया है। इधर, भाजपा इस पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस के अंदरूनी मतभेदों से जोड़कर हमला बोल रही है, तो कांग्रेस संगठन में समन्वय और एकजुटता की बात कह रही है। ऐसे में चुनाव से पहले बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस के भीतर की यह खींचतान चुनावी तैयारियों को प्रभावित करेगी, या पार्टी समय रहते मतभेदों को साधकर एकजुट नजर आएगी। फिलहाल भले ही यह कांग्रेस का अंदरूनी मामला हो, लेकिन बयानबाजी चरम पर है।और सत्ता पक्ष को एक और मौका विपक्ष पर वार करने के लिए काफी है.
उत्तराखंड में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही सत्ता के लिए अपनी-अपनी रणनीति पर काम कर रही हैं। भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का लक्ष्य लेकर संगठन को मजबूत कर रही है, तो कांग्रेस भी सत्ता में वापसी के लिए जमीन तैयार करने में जुटी है। लेकिन इस बीच कांग्रेस के भीतर की खींचतान ने सियासी हलचल और बढ़ा दी है। आपको बता दे कि चुनावी माहौल के बीच पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत लंबे समय बाद उत्तराखंड लौटे हैं और लगातार जनसंवाद यात्रा कर रहे हैं। उनकी इस सक्रियता को कांग्रेस को मजबूत करने की कोशिश बताया जा रहा है, लेकिन पार्टी प्रभारी कुमारी सैलजा ने इसे संगठन के समानांतर कार्यक्रम बताते हुए यात्रा रोकने को कहा है। बावजूद इसके रावत सक्रिय हैं और अब हाईकमान ने उन्हें दिल्ली बुलाया है।साथ ही भाजपा इस प्रकरण को अनेको तंज कस्ते हुए कांग्रेस की अंदरूनी कलह बता रही है, जबकि कांग्रेस एकजुट की बात कह रही है।
कुल मिलाकर उत्तराखंड में चुनावी बिगुल बजने से पहले ही कांग्रेस के भीतर मची यह हलचल पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बनती दिख रही है। हरीश रावत जैसे कद्दावर नेता की जनसंवाद यात्रा को जहां एक वर्ग कांग्रेस की वापसी के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं हाईकमान और प्रदेश प्रभारी इसे संगठन के समानांतर गतिविधि मानकर असहज हैं। दिल्ली तलब किए जाने के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि हाईकमान और हरीश रावत के बीच क्या सहमति बनती है। क्या रावत अपनी यात्रा पर विराम लगाएंगे या हाईकमान को उन्हें मनाने के लिए कोई बीच का रास्ता निकालना पड़ेगा। दूसरी ओर भाजपा इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहती और कांग्रेस की इस अंदरूनी कलह को मुद्दा बनाकर जनता के बीच यह संदेश देने की कोशिश में है कि जो पार्टी अपने वरिष्ठ नेता को नहीं सुन पा रही, वह प्रदेश कैसे चलाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में कांग्रेस की एकजुटता ही तय करेगी कि वह भाजपा के तीसरी बार सत्ता में वापसी के मिशन को कितनी चुनौती दे पाती है।