राम तेरी गंगा फिर मैली ! 

 

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, देवभूमि के गोमुख से निकलती निर्मल एक धारा आदि अनादि काल से जीवन दायनी मानी जाती है.ये धारा देवभूमि के देवप्रयाग में अलकनंदा और भागीरथी के संगम के मिलाप के बाद माँ गंगा के नाम से देश दुनिया में अपनी पवित्रता के लिए जानी भी जाती है.जिसके आचरण का मुख्य द्वार हरिद्वार है.आज इसी गंगा की निर्मलता के ऊपर सदन में कई सवाल सरकार के आगे विपक्ष के नेताओ ने खड़े कर दिए जिसका जवाब शायद किसी भी सरकार के पास ना आज है, और ना ही कभी पहले था, जी हां आपको बता दे,उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सदन में पेश हुई CAG रिपोर्ट को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा. कांग्रेस ने नमामि गंगे योजना और गंगा के पानी की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए.गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में चल रहे बजट सत्र के दूसरे दिन सदन में पेश हुई CAG की रिपोर्ट को लेकर सियासत गरमा गई है. कांग्रेस ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि यह रिपोर्ट उत्तराखंड में गंगा की स्थिति और नमामि गंगे योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करती है.जिस पर मुख्यमंत्री को जवाब देना होगा.CAG रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की प्रयोगशालाएं मानकों के अनुरूप नहीं हैं. कई प्रयोगशालाएं मान्यता प्राप्त भी नहीं हैं, जिससे पानी की गुणवत्ता की जांच पर सवाल खड़े हो रहे है. रिपोर्ट में यह भी सामने आया है, कि हरिद्वार में गंगा का पानी बी श्रेणी का पाया गया है, जो सीधे पीने योग्य नहीं माना जाता. ऐसे में यह चिंता का विषय है, कि जिस गंगा जल को करोड़ों लोग आस्था के रूप में देखते हैं, उसकी गुणवत्ता को लेकर गंभीर स्थिति सामने आ रही है.ऐसे में विपक्ष का सरकार से सवाल यह है. की गंगा करोड़ों सनातनियों की आस्था का केंद्र है.अगर गंगा जल की स्थिति खराब है. तो इसके लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है, और सरकार को इस पर सदन और जनता के सामने जवाब देना होगा.

प्रदेश की धर्मनगरी हरिद्वार में आगामी वर्ष 2027 में अर्ध कुम्भ भी होने जा रहा है. जिसके चलते करोड़ो श्रद्धालु इस आयोजन का हिस्सा बनते ऐसे में अर्धकुम्भ होने से पहले गंगाजल की पवित्रता पर सवाल खड़ा हो गया है। गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में चल रहे बजट सत्र के दूसरे दिन CAG की रिपोर्ट सदन में रखी गई, जिसके बाद सियासत गरमा गई। विपक्ष का कहना है. कि रिपोर्ट में उत्तराखंड में गंगा की स्थिति और नमामि गंगे योजना के क्रियान्वयन पर कई गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की कई प्रयोगशालाएं मानकों के अनुरूप नहीं हैं. और कई लैब मान्यता प्राप्त भी नहीं हैं। ऐसे में गंगा के पानी की गुणवत्ता की जांच पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। जिसके बाद सत्ता पक्ष अपनी सफाई देता हुआ नज़र आ रहा है.

CAG रिपोर्ट में यह भी सामने आया है. कि हरिद्वार में गंगा का पानी बी श्रेणी का पाया गया है, जो सीधे पीने योग्य नहीं माना जाता। यह स्थिति चिंताजनक मानी जा रही है, क्योंकि करोड़ों लोग गंगा जल को आस्था और पवित्रता के प्रतीक के रूप में देखते हैं। विपक्ष का कहना है कि जब गंगा करोड़ों सनातनियों की आस्था का केंद्र है, तो उसकी गुणवत्ता को लेकर सामने आई यह स्थिति बेहद गंभीर है।जिस पर सरकार मौन है.

अब देखना यह होगा कि CAG की इस रिपोर्ट और विपक्ष के आरोपों पर सरकार क्या जवाब देती है, और करोड़ो श्रद्धालुओं की आस्था व गंगा की निर्मलता को बनाए रखने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, और ऐसे में सदन के दौरान उठाये गये सवालों पर सरकार को सदन और जनता के सामने स्पष्ट जवाब देना चाहिए कि नमामि गंगे के चलते हर साल करोडो का बजट गंगा की देख रेख में लगता है. इसके बावजूद आज भी हरिद्वार नगरी में जल पीने योग्य तो बिलकुल नहीं है.तो अब तक लगा गंगा पर पैसा क्या सही से नहीं लग पा रहा है. अगर सब सरकार सही काम कर भी रही है. तो आज भी राम की गंगा मैली क्यों है.और गंगा की सफाई के लिए चलाई जा रही योजनाओं का अब तक क्या असर हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *