उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, उत्तराखंड चारधाम यात्रा की तैयारियां, संबंधित विभागीय स्तर पर जोरों- शोरों से चल रही है. संभावना जताई जा रही है कि मार्च के पहले हफ्ते तक चार धाम का स्वरूप तय हो जाएगा.आपको बता दे ,2025 में चारो धामों में 60 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पिछले साल प्रदेश में आ चुके है..इस साल चारधाम यात्रा के दौरान पिछले साल के मुकाबले अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. यही वजह है कि राज्य सरकार की ओर से व्यवस्थाओं को जल्द से जल्द दुरुस्त करने पर जोर दिया जा रहा है. ताकि चारधाम की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके.वही उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चार धाम यात्रा से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है. राज्य सरकार चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से रजिस्ट्रेशन शुल्क लेने पर विचार कर रही है. इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसले से पहले डिटेल अध्ययन के लिए कमेटी गठित कर दी गई है. गढ़वाल मंडल के कमिश्नर विनय शंकर पांडेय की अध्यक्षता में बनी यह कमेटी अलग-अलग पक्षों से राय लेकर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी. कमेटी यह तय करेगी कि शुल्क लिया जाए या नहीं और अगर लिया जाए तो उसकी रकम कितनी हो. आखिरी फैसला राज्य सरकार द्वारा लिया जाएगा.वहीं इस पूरे मामले पर विपक्षी दलों ने सरकार की पूर्व में रही चारधाम व्यवस्थाओ को पूरी तरह फेल बताते हुए श्रद्धालुओं से जबरन वसूली का आरोप चारधाम यात्रा के दौरान लगने का विरोध लगया है.
हालही में हुई चारधाम यात्रा 2025 में चारो धामों में 60 लाख से ज्यादा श्रद्धालु पिछले साल प्रदेश में आ चुके है..इस साल चारधाम यात्रा के दौरान पिछले साल के मुकाबले अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. यही वजह है कि राज्य सरकार की ओर से व्यवस्थाओं को जल्द से जल्द दुरुस्त करने पर जोर दिया जा रहा है.दरअसल, पिछले कुछ दिनों से इस विषय पर मंथन चल रहा था. की चारधाम यात्रा से जुड़े विभिन्न स्टेकहोल्डर्स जैसे होटल व्यवसायी, तीर्थ पुरोहित, स्थानीय व्यापारी और अन्य संबंधित पक्षों से अलग-अलग चरणों में बातचीत की गई. इन्हीं चर्चाओं के बाद रजिस्ट्रेशन शुल्क के प्रस्ताव को सैद्धांतिक रूप से हरी झंडी मिली है. सरकार की ओर से जो तर्क सामने आया है उसके मुताबिक, यात्रा के दौरान अवांछित तत्वों पर निगरानी मजबूत की जा सके. केवल गंभीर और वास्तविक श्रद्धालु ही यात्रा के लिए पंजीकरण कराएं. ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को ज्यादा सुव्यवस्थित और जिम्मेदार बनाया जा सके. भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी किया जा सके. इस मकसद के साथ शुल्क लगाने के बारे में विचार किया जा रहा है.जिसको लेकर विपक्ष इसका विरोध जता रहा है,
हर वर्ष लाखों श्रद्धालु चारधाम यात्रा में शामिल होते हैं. अब ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन जरूरी होने के बाद प्रशासन यात्रा प्रबंधन को और बेहतर बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. कमेटी अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को सौंपेगी. इसके बाद ही यह तय होगा कि रजिस्ट्रेशन शुल्क लागू किया जाएगा या नहीं और उसकी दर क्या होगी अभी इसका किसी को कोई अंदाजा नहीं लेकिन यात्रा शुरू होने से पहले रजिस्ट्रेशन शुल्क लागू किए जाने की चर्चा से विपक्षी दलों को चार धाम में श्रद्धालुओं की असुविधाओं को नजरअंदाज कर अवैध वसूली करने का गंभीर आरोप जरूर लगाया है.वही भाजपा सरकार यात्रा को बेहतर करने की बात कर रही है.
उत्तराखंड चारधाम यात्रा 2026 इस बार 19 अप्रैल से शुरू होने जा रही है. दरअसल, 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाने की संभावना है. ऐसे में गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही देवभूमि के चारधाम यात्रा की शुरुआत हो जाएगी, ऐसे में यह कमेटी चारधाम यात्रा रजिस्ट्रेशन के लिए क्या शुल्क होना चाहिए, यह तय करेगी. ताकि श्रद्धालुओं पर अत्यधिक भार भी ना हो और गलत लोग यात्रा में शामिल न हो सके. फिलहाल बैठक के दौरान इस बात पर भी चर्चा की गई थी कि चारधाम यात्रा के लिए फर्जी रजिस्ट्रेशन पर लगाम लगाने के लिए कम से कम 10 रुपए का शुल्क बतौर रजिस्ट्रेशन शुल्क लिया जाना चाहिए. इस पूरे मामले पर गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडे ने कहा कि कमेटी गठित कर दी गई है. ऐसे में कमेटी की रिपोर्ट आने और सरकार की मंजूरी मिलने के बाद रजिस्ट्रेशन शुल्क तय किया जाएगा.