महापंचायत पर जोर,इण्डिया गठबंधन का शोर !

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, प्रदेश का चर्चित अंकीता भंडारी हत्या कांड मामले को लेकर राजनीति कम होने का नाम नहीं ले रही है. हालांकि लम्बे समय के बाद मुख्यमंत्री धामी द्वारा मामले की जांच सीबीआई द्वारा कराने की संस्तुति प्रदान कर दी गयी लेकिन विपक्ष अभी भी सरकार पर सवाल खड़े करता हुआ दिखाई दे रहा है. विपक्ष का आरोप है कि तमाम मामले मे सरकार के निर्देश पर की जा रही सीबीआई जांच पूरी तरह से छलावा है. साथ ही जांच को सुप्रीम कोर्ट की निगरानी मे करवाने के लिए भी विपक्ष जोर डालता हुआ नज़र आ रहा है. यही नही बल्कि विपक्ष का यह भी मानना है कि सत्ता पक्ष भाजपा के कार्यकाल मे उत्तराखंड मे महिला अपराधों के आकड़ो मे वृद्धि हुई है. जिससे यह पता चलता है की भाजपा सरकार महिलाओं की सुरक्षा व क़ानून व्यवस्था की दृष्टि से पूरी तरह से विफल है. वही इस तमाम विषयों ने प्रदेश में एक बार फिर से हलचल भी पैदा कर दी है, आपको बता दे प्रदेश कांग्रेस के साथ अब सभी विपक्षी राजनीतिक दल व तमाम संगठन एक साथ मिलकर देहरादून में महापंचायत करने जा रहे है. यह फैसला तब लिया गया है. जब अंकिता भंडारी मामले में अज्ञात वी आई पी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. जिसको लेकर अब तक अलग अलग मंचो से इस मुद्दे पर आक्रोश जता रहे तमाम संगठनों द्वारा एक साथ मिलकर इंडिया गठबंधन के माध्यम से सरकार को घेरने के लिए आगामी 8 फरवरी को महापंचायत का आवाहन कर दिया गया है. वही महापंचायत से पहले प्रदेश की राजनीति में एक और नया उबाल भी दिखता नज़र आ रहा है.

अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में 8 फरवरी को देहरादून में होने जा रही महापंचायत की तैयारियां तेज हो गई है. विभिन्न सामाजिक, जन सरोकारों से जुड़े संगठनों,राज्य आंदोलनकारियों और राजनीतिक दलों की एक महत्वपूर्ण बैठक की. जिससे आने वाली 8 फरवरी को देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित होने वाली महापंचायत को सफल बनाने की रणनीति तैयार की गई. अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच की ओर से बुलाई गई इस बैठक में 40 से अधिक संगठनों ने भागीदारी की. इस दौरान सभी विपक्षी राजनीतिक दलों, सामाजिक और जन सरोकारों से जुड़े संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.वही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ किया है. की बेटी अंकिता के मामले में सरकार के सभी की मांग के चलते सीबीआई जांच की मांग को स्वीकारा है.इसके बाद भी विपक्षी दल अंकिता की मौत पर राजनीति कर रहे  है.विपक्ष का आरोप है कि तमाम मामले में सरकार के निर्देश पर की जा रही सीबीआई जांच पूरी तरह से छलावा है. साथ ही जांच को सुप्रीम कोर्ट की निगरानी मे करवाने के लिए भी विपक्ष जोर डालता हुआ नज़र आ रहा है.यही वजह है, की सभी विपक्षी दलों ने महापंचायत करने का बड़ा फैसला धामी सरकार के खिलाफ कर दिया है 

कुल मिलाकर इंडिया गठबंधन के नेताओं ने एक स्वर में अंकिता भंडारी हत्याकांड की वर्तमान समय में चल रही सीबीआई जांच को पूरी तरह से न कराते हुए ढकोसला करार दिया है. विपक्षी दलों का मानना है, कि यह जांच केवल वीआईपी को बचाने के लिए की जा रही है. इसलिए इंडिया गठबंधन इस जांच को पूरी तरह से खारिज करता है.महिला अपराधों को लेकर भी विपक्षी दलों ने सत्ता पक्ष से जवाब माँगा है.साथ ही भाजपा ने महिला अपराध और महापंचायत को लेकर सब्र रखने की बात करते हुए,देहरादून में होने जा रही महापंचायत को लेकर विपक्षी दलों पर हल्ला बोला है.

गौर हो कि बीती 15 जनवरी को संघर्ष मंच ने शहीद स्मारक में बैठक की थी और महापंचायत का ऐलान किया था. बैठक में अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी के खुलासे और उसको बचाने में संलिप्त सभी लोगों को सजा दिलाने की मांग उठाई गई थी. मंच का कहना है कि जब तक अंकिता को पूरा न्याय नहीं मिल जाता है, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा. वहीं, मंच ने महापंचायत में प्रदेश से काफी संख्या में लोगों के जुटने का दावा किया है.लम्बे समय से चल रहे अंकिता भंडारी हत्या कांड में अभी तक तीन की गिरफ़्तारी हो गई है.सभी दल लम्बे समय से वी आई पी के नाम को लेकर सरकार हल्ला बोल रहे है.अभी तक वी आई पी नाम का खुलासा ना होने साथ ही जांच को सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में करवाने के लिए अब एक ही मंच से संयुक्त महापंचायत कर सरकार को घेरने में जुट गए है.अब देखने वाली बात यही होगी क्या सरकार सभी दलों की इस महापंचात के बाद कोई और बड़ा फैसला लेगी या ये महापंचायत व्यर्थ ही चली जायेगी या इस महापंचायत के जरिये 2027 का बिसक सभी राजनैतिक दल बिछाने में जुट गए है.

   

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