तीर्थ पुरोहितों की मांग,कुंभ में गैर हिन्दुओं पर विराम !

देवभूमि उत्तराखंड 2027 में होने जा रहा अर्धकुंभ मेले से पूर्व धर्मनगरी हरिद्वार में कुंभ मेला क्षेत्र को गैर हिंदू प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किए जाने की मांग उठी है. हिंदूवादी नेता और श्री गंगा सभा के साथ ही अन्य कई तीर्थ पुरोहितों ने यह मांग उठाई है.हरिद्वार में सरकार से कुंभ क्षेत्र को हिंदू क्षेत्र घोषित करने की मांग की गई.जानकारों का कहना है. कि अंग्रेजों के समय में भी नगर पालिका हरिद्वार में गैर हिंदुओं के हरिद्वार में ठहरने और व्यवसाय ना करने को लेकर नियम था. इसलिए ये समय की मांग है. कि आने वाले कुंभ से पहले सभी गंगा घाटों और धार्मिक स्थलों पर गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई जाए.साथ ही भव्य और दिव्य कुंभ के साथ सुरक्षित कुंभ के लिए भी ये बहुत जरूरी है. कुंभ क्षेत्र को गैर हिंदुओं के लिए वर्जित किए जाने की तीर्थ पुरोहितों की मांग पर लोक सभा संसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सवाल खड़े किए तो संतों ने उसका स्वागत किया। संतों का ये भी मानना है की यदि कोई गैर हिन्दू क्षेत्र में आता है. तो उसके खिलाफ प्रशासन कार्रवाई करे. जब धामी सरकार कुंभ के लिए बड़ी योजना बना रही हैं. तो यह भी हो सकता है. धार्मिक स्थल, घाटों पर गैर हिन्दुओं का प्रवेश वर्जित हो.पूरे क्षेत्र में कड़े नियम बनाने चाहिए. जब बायलॉज बना था तब आबादी कम थी. अब आबादी भी बढ़ गई है. और क्षेत्र का भी विस्तार हुआ है. सोशल मीडिया के माध्यम से बहुत गलत संदेश जा रहा है. इसलिए अपनी सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने का अधिकार सभी को है.गंगा महासभा और साधु संतों के द्वारा सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा. जिससे सरकार इस पर कार्य शुरू करें.वही विपक्ष दल धर्म के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगा रहे है.

हिंदूवादी नेता और तीर्थ पुरोहितों ने कुंभ क्षेत्र में गैर हिन्दुओं के आने पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई.जिसको लेकर कुंभ आने से पहले एक बड़ा विवाद खड़ा होता नजर आ रहा है. हरिद्वार लोकसभा सीट से सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसे जल्दबाजी में किए जाने वाला फैसला बताया। त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है. कि कुंभ क्षेत्र कहां तक है पहले इस बात का डिसीजन हो जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुंभ क्षेत्र की बात है तो इस पर अभी कुछ भी कहा जाना जाना जल्दबाजी होगा क्योंकि कुंभ क्षेत्र रुड़की मंगलौर बहादराबाद श्यामपुर तक है. फिर ऐसे में गैर हिंदुओं के लिए क्या व्यवस्थाएं होंगी क्या उनको विस्थापित किया जाएगा या नहीं। उन्होंने इस फैसले में को फिलहाल जल्दबाजी में उन्होंने कहा कि इस पर अभी चिंतन मंथन और अध्ययन करने की जरूरत है। वहीं संतों ने तीर्थ पुरोहितों की मांग का स्वागत करते हुए कहा कि प्राचीन काल से ही इस तरह की व्यवस्था है. और अगर इस पर सरकार कोई फैसला लेती है तो वह स्वागत योग्य होगा। तीर्थ पुरोहित और गंगा सभा की कुंभ मेला क्षेत्र को गैर हिंदुओं के लिए वर्जित किए जाने की मांग पर संतों में मिली जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कुछ संत इस मांग का समर्थन करते हुए नजर आए तो कुछ संतों ने इसे मेला क्षेत्र को देखते हुए अव्यावहारिक बताया। संतों ने इस मांग को जायज ठहराते हुए कहा कि जब वेटिकन सिटी में कोई भी गैर ईसाई नहीं रह सकता तो फिर हरिद्वार देश की आध्यात्मिक राजधानी है तो यहां भी इस तरह का प्रावधान किया जाना चाहिए। महामंडलेश्वर ज्योतिर्मयनन्द ने कहा कि हमारा सनातन वैश्व कुटुंभकम की भावना रखता है लेकिन जब हमारा धर्म को साजिश के तहत अपवित्र किया जाता है तो इस तरह की मांग जायज दिखाती है।  

 

हरिद्वार कुंभ क्षेत्र को गैर हिंदुओं के लिए प्रतिबंधित किए जाने की तीर्थ पुरोहितों की मांग पर अब सियासत और संत समाज की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। भाजपा साधु संतों की मांग को जायज और विचार करने की बात कर रही है,तो वही विपक्षी दल इसको मुद्दों से भटकने और धर्म के नाम पर राजनीति करने का षड्यंत्र बता रहे है.

तीर्थ पुरोहित उज्ज्वल पंडित ने कहा कि इस कार्य के लिए सभी सनातनियों को आगे आना होगा. योजना साकार होने पर किसी को घाटों पर पूजा पाठ करने में परेशानी नहीं होगी. आज बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा है, इसलिए अपने धर्म और लोगों को बचाना सभी का कर्तव्य है.2027 अर्धकुंभ मेले से पूर्व धर्मनगरी हरिद्वार में कुंभ मेला क्षेत्र को गैर हिंदू प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किए जाने की मांग अब तेजी से बढ़ती नजर आ रही है. हिंदूवादी नेता और श्री गंगा सभा की बात पर अब आने वाले कुंभ मेला क्षेत्र को गैर हिंदुओं के लिए वर्जित किए जाने की मांग पर धामी सरकार क्या निर्णय लेती है. ये देखना दिलचप्स होगा। 

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट 

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