टूट रहे सभी रिकॉर्ड, फिर भी UCC का विरोध ! 

 उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट , उत्तराखंड राज्य सरकार द्वारा लागू किया गया समान नागरिक संहिता (यूसीसी) निरंतर गतिमान है, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में देश का सबसे पहला यूसीसी कानून लागू करने वाला राज्य उत्तराखंड ही है. सभी धर्मों के नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और संपत्ति जैसे व्यक्तिगत मामलों के लिए जिससे सभी धर्मों के अलग-अलग पर्सनल लॉ खत्म हो और कानून में समानता व सरलता लाने के लिए उत्तराखंड में इस कानून को 27 जनवरी 2025 को लागू किया गया है. जिसमे महिलाओं के अधिकारों और लिव-इन रिलेशनशिप को भी शामिल किया गया है. वही इस कानून के आने के बाद से ही आमजन में मैरिज रजिस्ट्रेशन के लिए भी जागरूकता बढ़ती हुई दिखाई दे रही है, आपको बता दे कि पुराने एक्ट के मुकाबले मैरिज रजिस्ट्रेशन कराने वालों की प्रतिदिन की औसत संख्या में 24 गुना की बढ़ोतरी भी हुई है. वही आंकड़ों की बात करें तो राज्य में यूसीसी कानून लागू होने बाद 6 महीने की अवधि में मैरिज रजिस्ट्रेशन की संख्या तीन लाख से अधिक पहुंच गई है, वही सत्ता पक्ष का यह भी मानना है कि आने वाले चुनावों में यूसीसी बड़ा मुद्दा बनने वाला है. जिसको लेकर विपक्ष घबराया हुआ है,     बलहाल यह तो देखने वाली बात होगी की आने वाले चुनाव में किन किन विषयों को लेकर पक्ष विपक्ष की हार व जीत तय होगी लेकिन इस मुद्दे के जरिये एक बार फिर से राजनीतिक गलियारों में यूसीसी को लेकर शोर सुनाई देने लग गया है. विपक्ष जहाँ एक ओर विवाह पंजीकरण के नये बढ़े हुए आकड़ो के आने बाद भी यूसीसी कानून पर अगंभीर नज़र आ रहा है. वही सत्ता पक्ष अभी भी यूसीसी कानून को लेकर अडिग दिखाई दे रहा है. जिसके बाद एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मियों के बीच तंज और पलटवार का सिलसिला शुरु हो गया है,

उत्तराखंड प्रदेश में धामी सरकार की बड़ी उपलब्धि के तौर पर मानी जा रही, समान नागरिक सहिंता (यूसीसी) निरंतर गतिमान है,आपको बता दे, वर्ष 2010 में लागू पुराने एक्ट के तहत 26 जनवरी 2025 तक कुल 3 लाख 30 हजार 64 मैरिज रजिस्ट्रेशन हुए थे. प्रतिदिन की औसत देखी जाए तो पुराने एक्ट के अनुसार, प्रतिदिन मैरिज रजिस्ट्रेशन की औसत संख्या मात्र 67 थी, जो यूसीसी लागू होने बाद 1634 पहुंच गई है. जिसको लेकर यह भी कहा जा सकता है. की सत्ता पक्ष को आने वाले चुनावों के लिए यूसीसी एक ब्रह्मास्त्र के रुप में काम आ सकता है,.हालाकि विपक्ष के कड़े विरोध के बाद भी धामी यूसीसी बिल पास करने को लेकर अटल रहे जिसको प्रदेश के हित में माना गया विधानसभा में पास भी करा लिया गया, जिस पर राज्यपाल की अनुमति मिलने के बाद प्रदेश में लागू करने की प्रकिर्या को भी अमल में लाया जा रहा था.लेकिन कही न कही कमियों के कारण समान नागरिक संहिता संशोधन विधेयक को लोक भवन ने वापस लौटा दिया है। विधेयक की धारा-चार में निर्धारित आयु से कम में विवाह पर सजा के प्रावधान का दो बार उल्लेख किए जाने पर लोकभवन ने आपत्ति जताई है।अब धामी कैबिनेट में एक बार फिर समान नागरिक संहिता (यूसीसी) करेक्शन कर कैबिनेट में पास कर लिया गया है. 

    

यूसीसी में अलग-अलग रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन की स्थिति क्या है.आपको एक नजर में आकड़ा समझते है –

विवाह रजिस्ट्रेशन के लिए 4,08,244 लोगों के आवेदन किए. जिसमें से 3,89,125 आवेदन अप्रूव हुए. जबकि, 15,713 आवेदन रिजेक्ट और 2,245 आवेदन पेंडिंग हैं.
रजिस्टर्ड विवाह की स्वीकृति के लिए 85,016 लोगों ने आवेदन किए. जिसमें से 82,223 आवेदन अप्रूव हुए. जबकि, 2,399 आवेदन रिजेक्ट और 252 आवेदन पेंडिंग हैं.
तलाक रजिस्ट्रेशन के लिए 374 लोगों ने आवेदन किए. जिसमें से 312 आवेदन अप्रूव हुए. जबकि, 53 आवेदन रिजेक्ट और 3 आवेदन पेंडिंग हैं.
लिव इन रिलेशनशिप रजिस्ट्रेशन के लिए 156 लोगों ने आवेदन किए. जिसमें से 65 आवेदन अप्रूव हुए. जबकि, 81 आवेदन रिजेक्ट और 3 आवेदन पेंडिंग हैं.
लिव इन रिलेशनशिप टर्मिनेशन के लिए 2 लोगों ने आवेदन किए थे. जिनके आवेदन को मंजूरी मिल चुकी हैं.
वसीयत पंजीकरण के लिए 4,816 लोगों ने आवेदन किए. जिसमें से 3,849 आवेदन अप्रूव हुए. जबकि, 857 आवेदन रिजेक्ट और 109 आवेदन पेंडिंग हैं.

वही यूसीसी कानून लागू होने से पहले और लागू करने के बाद जिस प्रकार से विपक्ष सरकार व सत्ता पक्ष पर सवाल खड़े करता नज़र आ रहा था उसी प्रकार एक बार फिर यूसीसी के अंतर्गत आये नये विवाह पंजीकरण के आकड़ो को लेकर सरकार पर विपक्ष निशाना साध रहा है. विपक्ष का मानना है. कि यूसीसी का कोई भी प्रभाव प्रदेश में नही पड़ रहा है. और सत्ता पक्ष बार बार यूसीसी से सम्बन्धित बातो को उजागर कर केवल और केवल अपना टारगेट चुनावों के लिए सेट करता दिखाई दे रहा है. वही सत्ता पक्ष यूसीसी को न केवल एक कानून बल्कि एक राष्ट्रव्यापी मुद्दे की नज़र से देखता नज़र आ रहा है.

  आपको बता दे ,प्रदेश में यूसीसी लागू होने के बाद रजिस्ट्रेशन के लिए 250 रुपए शुल्क निर्धारित किया गया था. साथ ही 27 मार्च 2010 के बाद और 27 जनवरी 2025 से पहले हुई शादियों के विवाह रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य किया गया. इसके अलावा लिव इन रिलेशनशिप को लेकर भी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया. शुरुआती दौर में विवाह रजिस्ट्रेशन के प्रति लोगों का रुझान काफी कम देखा गया, जिसके चलते विवाह रजिस्ट्रेशन में लगने वाले शुल्क को छूट देते हुए निशुल्क कर दिया गया.साथ ही बीते वर्ष 2010 में लागू पुराने एक्ट के तहत 26 जनवरी 2025 तक कुल 3 लाख 30 हजार 64 मैरिज रजिस्ट्रेशन हुए थे. प्रतिदिन की औसत देखी जाए तो पुराने एक्ट के अनुसार, प्रतिदिन मैरिज रजिस्ट्रेशन की औसत संख्या मात्र 67 थी, जो यूसीसी लागू होने बाद 1634 पहुंच गई है.आने वाले समय में जानकारों की मानें तो. ये आकड़ा बढ़ता नजर आयेगा यही वजह है. की अब आने वाले चुनाव में भाजपा प्रदेश में यूसीसी लागू करने का पूरा क्रेडिट जनता के बीच बटोरने में लग गई है. और विपक्षी दल इसका विरोध करने में जुट गई है.देखना होगा अब इसका फायदा आने वाले समय पर किस को मिलेगा। 

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