जनता को समझ ना आया, सांसद अपना या पराया !

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, देवभूमि उत्तराखंड देश में अपनी आध्यात्मिक दृष्टि से अलग ही पहचान रखती है.जहा आपदाओं से प्रदेश को कई बार दो चार होना भी पड़ता है.अब तक आकड़ो की माने तो जो भी प्रदेश में दैविक आपदा आई उसके जख्म अभी भी प्रदेश की जनता झेल रही है,जहा एक तरफ उत्तराखंड के सैकड़ों स्कूल जर्जर हालात में टूटने को तैयार हैं, हजारों गांव पेयजल के लिए जूझ रहे हैं ,शिक्षा, चिकत्सा आज भी कंधे के साहरे चल रही है.तो दूसरी ओर उत्तराखंड के सांसद हैं. कि वे अपनी सांसद निधि हरियाणा और यूपी पर बरसा रहे हैं। इनमे रानी साहिबा टिहरी गढ़वाल सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह सबसे आगे हैं। एक RTI के अनुसार उत्तराखंड की सांसद निधि का बड़ा हिस्सा यूपी और हरियाणा के विकास में खर्च हुआ है। आरटीआई से मिले दस्तावेजों के अनुसार सांसदों ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में ट्यूबवेल लगवाने, स्कूल व सामुदायिक भवन निर्माण और जल निकासी जैसे कार्यों के लिए 1.28 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। दूसरे राज्यों के विकास पर दरियादिली दिखाने में टिहरी गढ़वाल सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह सबसे आगे हैं। उन्होंने यूपी के आगरा जिले पर विशेष ध्यान दिया है। इस जिले के लिए उन्होंने वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल एक करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की। इसमें फुटपाथ, पैदल मार्ग, पेयजल से जुड़े कार्य शामिल थे। वहीं, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने हरियाणा में स्कूल, कॉलेज, सामुदायिक भवनों के लिए 25 लाख आवंटित किए। हालांकि नए नियमों के अनुसार 25 लाख की धनराशि अब सांसद किसी भी राज्य में खर्च कर सकते हैं।अल्मोड़ा से लोकसभा सांसद अजय टम्टा ने अपने संसदीय क्षेत्र से इतर नैनीताल जिले पर दरियादिली दिखाई है। उन्होंने नैनीताल जिले में स्कूल व कॉलेजों में कमरों और हॉल के निर्माण लिए 27 जून 2025 को पांच लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की थी।ऐसे में अपने प्रदेश की कठनाईयो को झोड़ सांसद अन्य राज्य में पैसा खर्च कर रहे है. जिससे प्रदेश की जनता सवाल पूछ रही है. ऐसे में विपक्ष को बड़ा मुद्दा चुनाव के आने से पहले अब मिल गया है।

उत्तराखंड के कई गांव जहां पानी समेत कई बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं, वहीं राज्य के सांसद अपनी निधि का एक बड़ा हिस्सा दूसरे राज्यों में खर्च कर रहे हैं। सूचना के अधिकार (आरटीआई) में इसका खुलासा हुआ है। आरटीआई से मिले दस्तावेजों के अनुसार सांसदों ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों में ट्यूबवेल लगवाने, स्कूल व सामुदायिक भवन निर्माण और जल निकासी जैसे कार्यों के लिए 1.28 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।भाजपा इसको सांसदों का विषय अधिकार मान रही है.और विपक्षी दल प्रदेश के 8 सांसदों पर जनता के साथ धोखा करने का गंभीर आरोप लगाया है.

 उत्तराखंड की सांसद निधि  यूपी व अन्य राज्यों में बट रही धनराशि को लेकर राजनीतिक विपक्षी दल आमने-सामने हो चले हैं. एक तरफ प्रदेश दैविक आपदाओं सहित कई विकास के कार्यों को लेकर तरस रहा है, तो वहीं विपक्ष को एक और बैठे बिठाये नया मुद्दा मिल गया है, जिस पर भाजपा का साफ तौर पर कहना है. कि कोई भी सांसद अधिनियम 2024 के तहत अपने प्रदेश के अलावा किसी भी अन्य राज्य पर 50 लाख रुपए तक की धनराशि विकास कार्य के लिए खर्च कर सकता है. तो विपक्ष को क्या आपत्ति है. जो सांसदों का अपना अधिकार है.इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए।  

आपको बता दे, दूसरी राज्यों में निधि खर्च करने की छूट नियमों में हुए बदलाव से संभव हुई है। केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के 13 अगस्त 2024 के पत्र के अनुसार, पीएम फंड खर्च में संशोधन किए गए हैं। अब सांसद देश में कहीं भी विकास कार्यों की सिफारिश कर सकते हैं। लेकिन एक वित्तीय वर्ष में इसकी अधिकतम सीमा 50 लाख होनी चाहिए। ऐसे में सवाल सिर्फ खर्च का नहीं है. सवाल उन दैविक आपदाओं से पीछे रहा हमारा प्रदेश अभी तक अपने जख्मों को भर नहीं पाया जहां का हर एक नागरिक हजारों रुपए कर्ज के ताले में डूबा हुआ है. तो क्या मान्य सांसदों को इस तरह से जनता के पैसे को अपने ही प्रदेश के अलावा किसी और प्रदेश में बांटना सही है. और वह भी तब, जब सारी भौगोलिक स्थितियों का इन तमाम सांसदों को भली-भांति जानकारी है. तो क्या जनता को आने वाले समय में इन सवालों के जवाब इन सांसदों से मिल पाएंगे या जनता ऐसे ही बेबाकी से अपने लाड प्यार में इन सांसदों को ऐसे ही दुलारती रहेगी। 

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