करोड़ों श्रद्धालु पहुचेंगे द्वार,डबल इंजन की दरकरार ! 

उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट , प्रदेश उत्तराखंड में आगामी वर्ष 2027 में अर्धकुंभ मेले की तैयारियों के बीच बैठकों का दौर लगातार जारी है. आपको बता दे 1 जनवरी 2027 से उत्तराखंड में हरिद्वार अर्धकुंभ 2027 का आयोजन शुरू हो जाएगा जिसको लेकर अभी से लगातार प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कुंभ मेले के सभी स्थाई और अस्थाई निर्माण कार्यों की प्रगति से भी अवगत कराया जा रहा है. वही हालही में हुई एक बार फिर अर्धकुम्भ मेले की तैयारियों को लेकर बैठक के दौरान साधु संतों द्वारा अपने अपने सुझाव दिए गये. कुम्भ मेले के दौरान तीन महीने की अवधि तक आश्रमों के बिजली, पानी और शिविर के बिल माफ करने की मांग भी रखी गई, जिसको लेकर अधिकारियों ने साधु संतों के सुझाव और उनकी मांगों को पूरा करने का आश्वासन भी दिया है.यही नहीं बल्कि कुम्भ मेले के दौरान यात्रियों और श्रद्धालुओं को हर प्रकार से बेहतर सुविधाएं मिले इसके लिए भी बैठक में सुझाव रखे गये. क्योकि कुम्भ मेले के दौरान लोगों की आस्था का सैलाब देखने को मिलता है. और लाखों करोड़ो श्रद्धालु व यात्री मेले के दौरान शिरकत करते है ऐसे में यह समय सरकार व प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण भी माना जाता है. और सुरक्षा व सुविधा की नज़र से प्रशासन पूरी तरह कमर कस्ता भी दिखाई देता है. लेकिन अबकी बार होने जा रहा उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार में कुम्भ मेला उत्तराखंड पुलिस के सामने चुनौती भरा होने वाला है. दरअसल, कुंभ मेले में बाहरी राज्यों से लगने वाली पुलिस फोर्स इस बार नहीं लग पाएगी. साल 2027 में होने वाले चुनाव के कारण बाहरी राज्यों से फोर्स नहीं आ पाएगी. जिसकी वजह से इस बार प्रदेश पुलिस प्रशासन को ही अपनी कमर कसनी पड़ेगी, ऐसे में सवाल यही है इस बार कुम्भ मेला का आयोजन प्रदेश सरकार महाकुम्भ की तरह मनाने की बात कर रही है, उम्मीद भी जताई जा रही है की संख्या करोडो की हो सकती है, ऐसे में आयोजन के दौरान सुरक्षा की दृष्टि से किस प्रकार राज्य सरकार कार्य करेगी यह भी देखने वाली बात होगी, लेकिन कही न कही यह अपने आप में एक गंभीर विषय भी है. वही इस विषय के चलते प्रदेश की राजनीति में “कुम्भ मेला” एक बार फिर मुद्दा बनता नज़र आ रहा है, विपक्ष सुरक्षा की दृष्टि से सरकार को घेरने का काम कर रहा तो वही सत्ता पक्ष अपने दावे पेश कर रहा है.

 

2027 अर्धकुंभ मेले की तैयारियां के बीच बैठकों का दौर जारी है. अपर कुंभ मेलाधिकारी दयानन्द सरस्वती ने बताया कि बैठक सभी साधु संतों को साथ लेकर भव्य और सुरक्षित कुंभ मेले का आयोजन किया जाएगा. आगे भी बैठकों में कुंभ मेला क्षेत्र के सभी साधु संतों को बुलाकर उनके सुझाव लिए जाएंगे. साधु संतों ने जितने भी सुझाव दिए हैं, उन सभी सुझावों को उच्च स्तर पर भेजा जाएगा. मठ मंदिर और आश्रमों के साधु संतों की मांग है की कुंभ मेलाधिकारी कुंभ के दौरान बिजली, पानी, सड़क, शौचालय, शिविर और भूमि आवंटन से जुड़ी तमाम व्यवस्था संतो को उपलब्ध कराए.वही आगामी कुंभ महोत्सव 1 जनवरी से शुरू होगा, जिसमें शाही स्नान के लिए संतों द्वारा तिथि दे दी गई है. इस दौरान भीड़ काफी अधिक होती है. अप्रैल में होने वाले शाही स्नान में श्रद्धालुओं की संख्या भी काफी अधिक होती है.ऐसे में बड़ा चेलेंज प्रदेश मित्र पुलिस पर आ कर खड़ा हो गया है. आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप ने बताया कि, पिछले कुंभ में उत्तराखंड के आसपास के राज्य उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश से पुलिस फोर्स मिली थी. लेकिन इस बार 2027 में चुनाव होने के कारण पुलिस फोर्स का मिलना मुश्किल है.जो बेहद चिंता का विषय है.

प्रदेश में आगामी 2027 प्रदेश सरकार के लिए बड़ा चुनौतियों भरा होने जा रहा है, 27 में ही नन्दराज जात यात्रा,अर्धकुम्भ,चारधाम यात्रा सहित विधानसभा चुनाव होने है. हालाकि हर साल चारधाम यात्रा को लेकर विपक्षी दल सरकार की कमियों और खामियों को गिनता और विरोध करता नजर आता है ऐसे में इस बार ये बड़े आयोजन बिना केंद्र सरकार की मदद के बिना पुरे होने असंभव से है, हालाकि भाजपा सरकार इन आयोजनों को पूरा करने का दावा तो कर रही है लेकिन विपक्षी दल अभी से कई सवाल खड़े करते नजर आ रहा है.

हलाकि इस बार सरकार अर्धकुंभ मेले को महाकुंभ की तर्ज पर आयोजित करने जा रही है. इसी कड़ी में केंद्र सरकार से उत्तराखंड की धामी सरकार ने एक बड़े बजट की मांग की थी.केंद्र सरकार ने हरिद्वार में आयोजित होने वाले अर्धकुंभ मेले के लिए 500 करोड़ रुपए का बजट जारी कर दिया है.गौर करने वाली बात ये है, कि साल 2021 के हरिद्वार कुंभ के लिए केंद्र सरकार ने 375 करोड़ रुपए जारी किए थे, जबकि में इस बार खर्च होने वाला पैसा डबल हो गया है. इस बजट के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पीएम मोदी और केंद्र सरकार को आभार व्यक्त किया है.लेकिन सवाल बजट का नहीं है. इससे ज्यादा सरकार को मैनपावर की आवश्यकता है,क्योकि सभी राज्यों में चुनाव है साथ ही प्रदेश में चुनाव सहित तीन बड़े आयोजन होने है.इसमें कोई दोहराए नहीं की 2027 चुनौतियों भरा होने के साथ करोड़ों यात्रियों के आने से भी आर्थिक स्थिति से मजबूत होगा,जिसमें जरूरत है, तो केंद्र सरकार और प्रदेश की धामी सरकार के डबल इंजन के साथ की जो मिल कर भव्य दिव्य आयोजन को पूरा किया जा सके. 

  

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