उत्तराखंड डेस्क रिपोर्ट, स्मार्ट सिटी के काम उत्तराखंड सरकार के लिए सिर दर्द बनते जा रहे हैं. विकास कार्यों की सुस्त गति जनता के लिए भी परेशानी का सबब रही है. इन हालातों के बीच भाजपा के राजपुर विधायक ने ऐसा बड़ा खुलासा कर दिया है, जो पूरे प्रोजेक्ट पर ही सवाल खड़े कर रहा है. दरअसल भाजपा विधायक ने सीधे तौर पर कह दिया है. कि देहरादून स्मार्ट सिटी में जो काम हुए हैं, वह संतोषजनक आधार पर नहीं किए गए,आपको बता दे स्मार्ट सिटी के कामो को लेकर दून स्मार्ट सिटी के नाम पर 1537 करोड़ रुपए की धनराशि सरकार ने सिटी को स्मार्ट करने की दी थी,जिसमें लगभग 500 करोड़ की धनराशि काम समय से पूरा न होने से केंद्र सरकार को वापस चली गई है. और स्मार्ट काम अभी भी अधूरा है, अब तो सरकार के विधायक भी इस बात को खुद स्वीकार करते नजर आ रहे है. की कमिटी सही नहीं बनाई गई और अधिकारियो की लापरवाही की वजह से आम जनता को परेशानी का सामना अलग उठाना पड़ गया है, उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्मार्ट सिटी को लेकर सियसत तेज हो गई है. स्मार्ट सिटी का सपना देखते-देखते देहरादून की सड़कें आज भी खुदी पड़ी हैं. योजनाएं फाइलों में दबी हैं और आम आदमी धूल-मिट्टी में सफर करने को मजबूर है. करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जमीन पर तस्वीर बदलने का नाम नहीं ले रही. हालत यह है कि खुद सत्तारूढ़ बीजेपी के विधायक इस काम से संतुष्ट नहीं हैं. और खुलकर नाराजगी जता रहे हैं. बीजेपी विधायक खजान दास देहरादून को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए जिस रफ्तार और जिस तरीके से काम होना चाहिए था, वह अब तक नहीं हो पाया और इससे वे खुद संतुष्ट नहीं हैं. यह बयान इसलिए भी अहम है. क्योंकि यह विरोधी खेमे से नहीं बल्कि सत्ता पक्ष के अपने नुमाइंदे की जुबान से निकला है.अब एक बार फिर विपक्ष को सरकार के स्मार्ट कामो को लेकर घेरने का मौका मिल गया है.
स्मार्ट सिटी के कामो की पोल दर बदर खुलती नजर आ रही है,बीजेपी विधायक खजान दास ने पत्रकारों से बातचीत में साफ शब्दों में कहा कि देहरादून को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए जिस रफ्तार और जिस तरीके से काम होना चाहिए था, वह अब तक नहीं हो पाया और इससे वे खुद संतुष्ट नहीं हैं.यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि यह विरोधी खेमे से नहीं बल्कि सत्ता पक्ष के अपने नुमाइंदे की जुबान से निकला है.हालांकि विधायक खजान दास ने सरकार का बचाव करते हुए यह भी कहा कि विकास कार्य लगातार जारी हैं और नई जरूरतों के हिसाब से योजनाओं में बदलाव होते रहते हैं. उनका यह भी मानना है कि किसी भी विकास कार्य को धरातल पर उतारने के लिए अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल बेहद जरूरी है. और इसकी कमी कहीं न कहीं इन कामों में रोड़ा बन रही है.वही भाजपा आपने विधायक का बचाव करती नजर आ रही है. भाजपा विधायक जी के बोल पर अब विपक्ष ने भी सरकार पर स्मार्ट कामो को लेकर हल्ला बोल दिया है.
वहीं अब इस पूरे मामले पर कांग्रेस इस सफाई से संतुष्ट नहीं है. कांग्रेस के ने तीखे तेवरों के साथ कहा कि जब स्मार्ट सिटी के लिए बजट आया था तभी से अधिकारियों और नेताओं में बंदरबांट शुरू हो गई थी.कांग्रेस ने उसी वक्त आगाह किया था कि इस लूट को रोको और पैसा जमीन पर दिखाओ. आज अगर बीजेपी के अपने विधायक सवाल उठा रहे हैं. तो यह कांग्रेस के उन्हीं आरोपों की पुष्टि करता है.वही भाजपा भी विकास के दावों का हवाला दे सही है, लेकिन स्मार्ट सिटी के नाम पर चुप्पी साधे है.और सभी विपक्षी दल स्मार्ट सिटी के कामों का हिसाब मांगते नजर आ रहे है.
फिलहाल स्मार्ट सिटी का मामला राजनीतिक रंग पकड़ चुका है. एक तरफ सत्ता पक्ष के विधायक खुद काम की धीमी गति पर असंतोष जता रहे हैं, तो दूसरी तरफ विपक्ष घोटाले के आरोप लगा रहा है. देखना यह होगा कि नई कार्यदाई संस्था के भरोसे यह शहर आखिरकार स्मार्ट सिटी का सपना कब पूरा कर पाता है.