आवाज उठाई, कीमत भी चुकाई…. सवालों से घिरे सांसद राघव चड्ढा ने किया पलटवार

डिजिटल डेस्क- राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच चल रही तनातनी अब खुलकर सामने आने लगी है। पार्टी से अलग-थलग पड़े राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को इंस्टाग्राम पर “Voice Raised Price Paid” शीर्षक से एक वीडियो साझा किया, जिसने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है। इस वीडियो में चड्ढा संसद में विभिन्न मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते नजर आ रहे हैं। यह पोस्ट ऐसे समय में सामने आई है, जब पार्टी के साथ उनके मतभेद लगातार चर्चा में हैं। वीडियो के साथ चड्ढा ने लिखा कि जो लोग उनके संसदीय कामकाज पर सवाल उठा रहे हैं, उनका वह सम्मान करते हैं, लेकिन अब वह अपने काम से ही जवाब देंगे। उनके इस बयान को पार्टी नेतृत्व के प्रति एक स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

बीती 2 अप्रैल को उपनेता के पद से हटाया गया था

दरअसल, 2 अप्रैल को आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया था। पार्टी ने उन पर आरोप लगाया था कि वह संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के खिलाफ मुखर नहीं हो रहे हैं और “सॉफ्ट पीआर” की राजनीति कर रहे हैं। हालांकि, चड्ढा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें “झूठ” बताया है। चड्ढा ने कहा कि वह संसद में हंगामा करने के लिए नहीं, बल्कि जनता के मुद्दे उठाने के लिए गए थे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उन्हें जानबूझकर बोलने से रोका जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर लगातार अपनी सक्रियता बढ़ा दी है और अपने कामकाज को सामने रख रहे हैं।

पद से हटाने के बाद राघव और पार्टी में दिखने लगी दूरियां

राजनीतिक विवाद तब और गहराया, जब पार्टी ने उनकी जगह अशोक कुमार मित्तल को राज्यसभा में डिप्टी लीडर बना दिया। इसके बाद से ही चड्ढा और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरी बढ़ती नजर आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें संसद में बोलने के मौके भी सीमित कर दिए गए थे। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं आतिशी और सौरभ भारद्वाज ने भी सार्वजनिक रूप से चड्ढा के रुख पर सवाल उठाए हैं। खासकर, केंद्र सरकार से जुड़े मुद्दों पर उनकी कथित चुप्पी और अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों में उनकी गैरमौजूदगी को लेकर आलोचना की गई।

चुप कराया जा रहा है, हराया नहीं जा रहा- राघव चड्ढा

इन आरोपों पर पलटवार करते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि उन्हें “चुप कराया जा रहा है, हराया नहीं जा रहा।” उन्होंने अपने संसदीय रिकॉर्ड का बचाव करते हुए दावा किया कि उन्होंने हर मौके पर जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाया है। एक अन्य पोस्ट में उन्होंने यह भी साझा किया कि वह The 48 Laws of Power पढ़ रहे हैं, जिसे उनके मौजूदा राजनीतिक दौर में रणनीतिक सोच का संकेत माना जा रहा है। हालांकि, अब तक राघव चड्ढा ने पार्टी छोड़ने या किसी नए राजनीतिक कदम की औपचारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन उनके हालिया बयानों और गतिविधियों ने अटकलों को जरूर तेज कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह साफ हो सकता है कि वह पार्टी में बने रहते हैं या कोई नया रास्ता चुनते हैं।

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