डिजिटल डेस्क- पश्चिम बंगाल में ईद का त्योहार जहां एक ओर पूरे उत्साह और भाईचारे के साथ मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ राज्य की सियासत भी चरम पर पहुंच गई है। विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद से ही राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और अब ईद के मौके पर भी नेताओं के बीच जुबानी जंग देखने को मिल रही है। बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए उनके ईद समारोह में शामिल होने को लेकर सवाल उठाए। सुवेंदु ने आरोप लगाया कि राज्य को ऐसे मुख्यमंत्री की जरूरत नहीं है, जो सिर्फ एक समुदाय को खुश करने की राजनीति करती हों। उन्होंने टीएमसी नेता फिरहाद हकीम के एक कथित बयान का जिक्र करते हुए भी हमला बोला।
सुवेंद्र अधिकारी के आरोपों पर टीएमसी ने किया पलटवार
सुवेंदु अधिकारी के इन आरोपों पर तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होना समाज में सौहार्द और भाईचारे को मजबूत करता है। अभिषेक ने इसे सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक बताते हुए कहा कि नेताओं को समाज को जोड़ने का काम करना चाहिए, न कि बांटने का। इस बीच सुवेंदु अधिकारी ने चुनाव को लेकर बड़ा दावा भी किया। उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव में वह ममता बनर्जी को 40 हजार वोटों के अंतर से हराएंगे। हालांकि, अभी नामांकन प्रक्रिया भी शुरू नहीं हुई है, लेकिन इस बयान ने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है। इससे पहले भी दोनों नेता आमने-सामने चुनाव लड़ चुके हैं, जिससे इस मुकाबले को और दिलचस्प माना जा रहा है।
सीएम ममता ने सभा ने दिखाए अपने तेवर
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी ईद के मौके पर जनता को संबोधित करते हुए अपने तेवर साफ कर दिए। उन्होंने कहा कि राज्य में हो रही बारिश को “अल्लाह की रहमत” बताते हुए लोगों से शांति और एकता बनाए रखने की अपील की। ममता ने यह भी आरोप लगाया कि कई लोगों के नाम सूची से हटाए गए हैं, जिसके खिलाफ उन्होंने कानूनी लड़ाई शुरू की है। ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी सरकार किसी के अधिकारों को छीने जाने नहीं देगी और हर नागरिक के अधिकारों की रक्षा की जाएगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि लोग एक-दूसरे का सम्मान करेंगे और राज्य में सौहार्द बनाए रखेंगे। ईद के इस मौके पर जहां एक तरफ धार्मिक उत्सव का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ सियासी बयानबाजी ने माहौल को गर्मा दिया है। बीजेपी, टीएमसी और अन्य दलों ने अपने-अपने तरीके से चुनावी अभियान तेज कर दिया है।