डिजिटल डेस्क- मध्य प्रदेश की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब अटेर से कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने उप नेता प्रतिपक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना इस्तीफा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा है। कटारे ने पत्र में लिखा कि वे परिवार और अपने क्षेत्र की जनता को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं, इसलिए इस जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहते हैं। इस्तीफे में उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी जिसे उपयुक्त समझे, उसे इस पद की जिम्मेदारी सौंप सकती है और वे संगठन के हर निर्णय में पूरा सहयोग करेंगे। उन्होंने आभार जताया कि पार्टी ने उन्हें इस योग्य समझा और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी।
सोशल मीडिया पर शेयर की पोस्ट
हालांकि इस्तीफे के साथ ही कटारे ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय पर तीखा हमला भी बोला। उन्होंने कहा कि विधानसभा जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच पर शब्दों और व्यवहार की मर्यादा अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार से जुड़े घटनाक्रम ने कई लोगों को आहत किया है। कटारे ने कहा कि कैलाश विजयवर्गीय जैसे अनुभवी जनप्रतिनिधि से सदन में अधिक संयम, संतुलन और शालीनता की अपेक्षा की जाती है। सार्वजनिक जीवन में अनुभव का अर्थ केवल पद की वरिष्ठता नहीं, बल्कि संवाद की संस्कृति और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करना भी है। उन्होंने कहा कि असहमति व्यक्त करना लोकतंत्र का अधिकार है, लेकिन अभिव्यक्ति की गरिमा बनाए रखना सभी का कर्तव्य है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में सदन की प्रतिष्ठा को और मजबूत करने की दिशा में सकारात्मक पहल होगी।
उमंग सिंघार ने दी प्रतिक्रिया
इधर, इस पूरे प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस जनता से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाती रहेगी और किसी दबाव में आने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि बिजली दरों में बढ़ोतरी, बेरोजगारी, आदिवासियों की जमीन और किसानों के मुद्दे कांग्रेस के एजेंडे में प्रमुख हैं। यदि विधायक इन विषयों को सदन में उठाते हैं तो वे आम जनता की आवाज को सामने लाते हैं। सिंघार ने बताया कि उन्होंने भी राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान जनता से जुड़े सवालों को प्रमुखता से रखा था। उनका कहना है कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका सरकार को जवाबदेह बनाने की होती है और कांग्रेस इस जिम्मेदारी को निभाती रहेगी।