डिजिटल डेस्क- आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली की भाजपा सरकार और शिक्षा विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सौरभ भारद्वाज का दावा है कि फीस कंट्रोल एक्ट को लेकर दिल्ली सरकार सुप्रीम कोर्ट को संतोषजनक जवाब देने में पूरी तरह नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में यह साफ हो गया कि भाजपा सरकार निजी स्कूलों की मनमानी फीस बढ़ोतरी पर लगाम लगाने में असफल रही है। सौरभ भारद्वाज के मुताबिक, शिक्षा मंत्री आशीष सूद के अधीन दिल्ली का शिक्षा विभाग यह समझाने में फेल रहा कि नए पारित अधिनियम के जरिए निजी स्कूलों की फीस को आखिर कैसे नियंत्रित किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने मध्यम वर्ग को यह कहकर गुमराह किया कि निजी स्कूलों द्वारा हाल ही में बढ़ाई गई फीस जल्द वापस कराई जाएगी, जबकि हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।
सुप्रीम कोर्ट में उठा फीस कंट्रोल एक्ट पर सवाल
आप नेता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान फीस नियंत्रण अधिनियम से जुड़े नियम और सर्कुलर तैयार करने में सरकार द्वारा जानबूझकर की गई देरी उजागर हो गई। सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि कोर्ट के सामने सरकार यह स्पष्ट नहीं कर पाई कि मौजूदा शैक्षणिक सत्र में बढ़ाई गई फीस पर यह कानून कैसे लागू होगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली की भाजपा सरकार का पर्दाफाश हो गया। शिक्षा विभाग यह बताने में असमर्थ रहा कि नया कानून निजी स्कूलों की मौजूदा फीस पर किस तरह असर डालेगा और उसे नियंत्रित करने का व्यावहारिक तरीका क्या है।
निजी स्कूलों से ‘सांठगांठ’ का आरोप
सौरभ भारद्वाज ने भाजपा सरकार पर निजी स्कूलों के साथ सांठगांठ का आरोप लगाते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट में यह बात साफ हो गई है कि सरकार निजी स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करना चाहती। उन्होंने कहा कि मध्यम वर्ग के अभिभावकों को सिर्फ झूठे वादों के जरिए गुमराह किया गया। आप नेता ने शिक्षा मंत्री आशीष सूद से सीधा सवाल पूछा कि वे एक भी ऐसे निजी स्कूल का नाम बताएं, जिसकी बढ़ी हुई फीस उनके विभाग ने वापस कराई हो। उन्होंने कहा कि अगर सरकार के दावे सही हैं, तो उसे इसका ठोस सबूत देना चाहिए।
क्या है पूरा मामला
यह पूरा मामला निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों द्वारा दायर याचिकाओं से जुड़ा है, जिन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। निजी स्कूलों का तर्क है कि नया फीस नियंत्रण कानून भविष्य के शैक्षणिक सत्रों के लिए लागू होना चाहिए, न कि चल रहे सत्र पर। स्कूलों का कहना है कि फीस का प्रस्ताव पहले तय होता है और मंजूरी बाद में मिलती है, ऐसे में सत्र के बीच नियम बदलना गलत है। दिल्ली सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि यह प्रक्रिया केवल 2025-26 के शैक्षणिक सत्र के लिए लागू होगी, लेकिन कोर्ट ने आशंका जताई कि इसका असर पहले से वसूली गई फीस पर भी पड़ सकता है। इसी को लेकर विवाद और गहरा गया है। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हैं, जो दिल्ली के लाखों अभिभावकों के लिए अहम साबित हो सकता है।