डिजिटल डेस्क- माघ मेले में बटुकों के कथित अपमान के मुद्दे पर अखिलेश यादव ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। रायबरेली दौरे के दौरान सपा प्रमुख ने कहा कि जब डिप्टी सीएम खुद कह रहे हैं कि अपमान करने वालों को पाप लगेगा, तो फिर उन्हें सजा क्यों नहीं दिलाई जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर दोनों डिप्टी सीएम कार्रवाई कराने में असमर्थ क्यों हैं। अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा, “अगर मुख्यमंत्री जापान चले जाएंगे तो क्या हमारे डिप्टी सीएम वहां धरना देने पहुंचेंगे?” उनके इस बयान को सत्ता पक्ष पर सीधा राजनीतिक प्रहार माना जा रहा है। सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि सरकार संवेदनशील मामलों में भी गंभीरता नहीं दिखा रही है।
यादव जी की लव स्टोरी पर भी दी तीखी प्रतिक्रिया
फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ को लेकर भी अखिलेश यादव ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह भारतीय जनता पार्टी की “लव स्टोरी” है और समाज को बांटने की कोशिश है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि पहले एक फिल्म के जरिए ब्राह्मण समाज को अपमानित किया गया, जिसका नाम तक लेना उचित नहीं समझते। उन्होंने कहा, “जो समाज ईमानदार है, उसे फिल्मों में गलत तरीके से क्यों दिखाया जा रहा है?” उनके इस बयान से फिल्म और राजनीति के बीच एक नया विवाद खड़ा होने के संकेत मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्तावित जापान दौरे पर भी सपा प्रमुख ने कटाक्ष किया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “जापान जा रहे हैं तो क्योटो भी चले जाइएगा, जिससे यह पता चल सके कि प्रधान संसदीय क्षेत्र काशी क्योटो जैसा क्यों नहीं बन पाया या उसकी विरासत कैसे बिगड़ी।” उन्होंने सुझाव दिया कि जापान से विरासत संरक्षण और शहरों के विकास का सकारात्मक सबक लेकर आना चाहिए।
कई मुद्दों पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि सरकार अपने अंतिम वर्ष में अध्ययन दौरे के नाम पर क्या नई योजना बना पाएगी। उन्होंने इसे “मनसुख-पर्यटन” करार देते हुए कहा कि यदि मुख्यमंत्री इसे स्वीकार कर लें तो कम से कम एक सच्चाई के लिए याद रखे जाएंगे। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि वनस्पति के विशेष अध्ययन का व्यक्तिगत लाभ ही उठाया जाएगा या इसे प्रदेश के हित में भी साझा किया जाएगा। सपा प्रमुख के इन बयानों से प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर तल्खी बढ़ गई है। माघ मेले का बटुक प्रकरण, फिल्मों को लेकर विवाद और मुख्यमंत्री के विदेश दौरे जैसे मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने हैं। आने वाले दिनों में इन बयानों पर भाजपा की प्रतिक्रिया भी राजनीतिक तापमान को और बढ़ा सकती है।