शिव शंकर सविता- महाराष्ट्र की राजनीति में अंबरनाथ नगर परिषद से जुड़ा घटनाक्रम बड़ा सियासी संदेश लेकर सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच बने अप्रत्याशित गठबंधन ने न सिर्फ शिंदे गुट की शिवसेना को सत्ता से बाहर कर दिया, बल्कि प्रदेश स्तर पर भी राजनीतिक भूचाल ला दिया। इस गठबंधन के बाद कांग्रेस ने सख्त कदम उठाते हुए अंबरनाथ नगर परिषद में बीजेपी के साथ हाथ मिलाने वाले अपने सभी 12 पार्षदों को पार्टी से निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही ब्लॉक कांग्रेस कार्यकारिणी को भी भंग कर दिया गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने इस फैसले को लेकर कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने साफ कहा कि पार्टी किसी भी स्तर पर बीजेपी के साथ गठबंधन को स्वीकार नहीं करेगी। सपकाल के मुताबिक, कांग्रेस की विचारधारा और राजनीतिक लाइन स्पष्ट है और जो भी नेता इसके खिलाफ जाकर निर्णय लेगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
गठबंधन को दिया गया अंबरनाथ विकास अघाड़ी का नाम
मुंबई से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित अंबरनाथ नगर परिषद में यह पूरा घटनाक्रम उस वक्त सामने आया, जब नगराध्यक्ष पद के चुनाव में बीजेपी ने कांग्रेस के समर्थन से बाज़ी मार ली। इस गठबंधन को ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ नाम दिया गया है। दिलचस्प बात यह है कि अंबरनाथ को शिंदे गुट की शिवसेना का मजबूत गढ़ माना जाता है और यहां से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे सांसद हैं। हालिया नगर परिषद चुनाव में कुल 60 सीटों के नतीजों के बाद शिवसेना (शिंदे गुट) को उम्मीद थी कि बीजेपी उसके साथ मिलकर नगर परिषद में सत्ता बनाएगी। लेकिन बीजेपी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर शिवसेना को झटका दे दिया। इस फैसले से शिंदे गुट में जबरदस्त नाराजगी देखने को मिल रही है।
शिंदे गुट ने किया भाजपा पर तीखा हमला
शिंदे गुट के विधायक डॉ. बालाजी किनिकर ने बीजेपी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि जो पार्टी ‘कांग्रेस-मुक्त भारत’ की बात करती है, वही आज कांग्रेस के साथ मिलकर शिवसेना पर वार कर रही है। उन्होंने इस गठबंधन को ‘अभद्र गठबंधन’ करार दिया। वहीं, सांसद श्रीकांत शिंदे ने भी बयान जारी कर कहा कि यह सवाल पूरी तरह से उनकी सहयोगी बीजेपी के लिए है और उसी को इसका जवाब देना चाहिए। श्रीकांत शिंदे ने आगे कहा कि बीजेपी और शिवसेना वर्षों से केंद्र, राज्य और स्थानीय निकाय स्तर पर साथ काम करते आए हैं और यह गठबंधन अटूट रहना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि अंबरनाथ में शिवसेना की सत्ता के दौरान विकास कार्य हुए हैं और आगे भी शिवसेना विकास की राजनीति करने वालों के साथ खड़ी रहेगी।
मामला सामने आने के बाद सीएम फडणवीस ने अपनाया सख्त रूख
इन आरोपों पर बीजेपी ने पलटवार किया है। भाजपा उपाध्यक्ष गुलाबराव करंजुले पाटिल ने कहा कि अगर वे पिछले 25 वर्षों से कथित भ्रष्टाचार में लिप्त शिंदे गुट के साथ सत्ता में रहते, तो वह ज्यादा अनुचित होता। उन्होंने यह भी दावा किया कि शिंदे गुट के साथ गठबंधन को लेकर कई बार बातचीत की कोशिश की गई, लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। मामले पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस के साथ गठबंधन स्वीकार्य नहीं है। फडणवीस ने संकेत दिए कि अंबरनाथ में स्थानीय स्तर पर लिया गया फैसला सुधारा जाएगा और भविष्य में कांग्रेस के साथ किसी भी तरह का गठबंधन नहीं होगा।