महाराष्ट्र निकाय चुनाव 2026ः AIMIM का चौंकाने वाला उभार, 74 सीटों पर विजयी हुए उम्मीदवार

डिजिटल डेस्क- महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों के चुनाव नतीजे सामने आ गए हैं, और यह स्पष्ट संकेत देते हैं कि राज्य की शहरी राजनीति अब पहले से अधिक प्रतिस्पर्धी और विविध हो गई है। बीएमसी सहित अधिकांश नगर निगमों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की अगुवाई वाली महायुति गठबंधन (बीजेपी+शिंदे शिवसेना) ने शानदार प्रदर्शन किया है। शुरुआती रुझानों के अनुसार, भाजपा कई प्रमुख नगर निगमों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। मुंबई में भी भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना सत्ता में आने के लिए मजबूत स्थिति में दिख रही है।

मुंबई में 5 , अमरावती में 6 तो मालेगांव में 20 प्रत्याशी विजयी

इस चुनाव में सबसे बड़ी चौंकाने वाली बात असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) का शानदार प्रदर्शन रहा। एमआईएम ने राज्य भर के मालेगांव, मुंबई, छत्रपति संभाजीनगर, धुले और नांदेड़ जैसे नगर निगमों में मजबूत पकड़ बनाई। कुल 74 एमआईएम उम्मीदवार निर्वाचित हुए हैं। मुंबई में पांच, संभाजीनगर में 24, अमरावती में छह और मालेगांव में 20 एमआईएम उम्मीदवार विजयी हुए। मालेगांव में AIMIM सबसे बड़ी पार्टी बनने की संभावना के साथ उभर रही है, जबकि नांदेड़ में एमआईएम दूसरे सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। धुले में एमआईएम ने आठ और जालना में दो सीटें जीतकर अपने प्रभाव को और मजबूत किया।

AIMIM के शानदार प्रदर्शन ने कई दलों को पहुंचाया नुकसान

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि AIMIM के इस प्रदर्शन ने महाविकास अघाड़ी (एमवीए) में शामिल दलों को नुकसान पहुंचाया है। पिछले कई चुनावों में एमआईएम केवल कुछ ही सीटों पर सिमटी रहती थी, लेकिन इस बार उसने अपने उम्मीदवारों को मुस्लिम बहुल और बहुजन बहुल क्षेत्रों में उतारकर बेहतर परिणाम हासिल किया। मालेगांव में छह एमआईएम उम्मीदवारों की जीत ने पार्टी की ताकत और रणनीति की पुष्टि की है।

AIMIM की सफलता ने बदला पूरा समीकरण

समाजवादी पार्टी ने भी कुछ क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन उसका प्रभाव अपेक्षाकृत सीमित रहा। मुंबई, मालेगांव और नांदेड़ में AIMIM के विजयी उम्मीदवारों ने इस क्षेत्रीय दलों के लिए चुनौती पैदा की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि AIMIM के सफल प्रदर्शन ने राज्य के शहरी चुनावी समीकरण को पूरी तरह बदल दिया है और आने वाले विधानसभा तथा जिला परिषद चुनावों में इसकी रणनीति महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। बीजेपी और महायुति गठबंधन की मजबूती इस चुनाव में स्पष्ट रूप से दिखाई दी। मुंबई और पुणे सहित प्रमुख नगर निगमों में उनकी बढ़त ने संकेत दिया कि शहरी केंद्रों में भाजपा की पकड़ अब पहले से ज्यादा मजबूत है। वहीं उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के गठबंधन को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। दोनों भाइयों के साझा प्रयासों के बावजूद उनके दल केवल सीमित सीटों पर ही आगे रह पाए।

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