पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री वीके इब्राहिम कुंजू का निधन, केरल की राजनीति को लगा बड़ा झटका

डिजिटल डेस्क- पूर्व पीडब्ल्यूडी मंत्री और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के वरिष्ठ नेता वीके इब्राहिम कुंजू का कोच्चि में निधन हो गया। उन्होंने एर्नाकुलम के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे 73 वर्ष के थे और लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। उनके निधन से केरल की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई है, खासकर मध्य केरल में मुस्लिम लीग को गहरा झटका लगा है। जानकारी के मुताबिक, वीके इब्राहिम कुंजू फेफड़ों के कैंसर का इलाज करा रहे थे। इसके अलावा वे मल्टीपल मायलोमा, हृदय विफलता और गुर्दा रोग जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से भी पीड़ित थे। पिछले कुछ समय से उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही थी, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

चार बार विधायक, दो बार मंत्री रहे

वीके इब्राहिम कुंजू का राजनीतिक करियर काफी लंबा और प्रभावशाली रहा। वे चार बार केरल विधानसभा के सदस्य चुने गए और दो बार राज्य सरकार में मंत्री रहे। उन्होंने मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन और मुस्लिम यूथ लीग के जरिए राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शुमार हो गए। मध्य केरल में वे मुस्लिम लीग का एक जाना-पहचाना और मजबूत चेहरा माने जाते थे। उन्होंने वर्ष 2001 और 2006 में मट्टनचेरी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा। 2006 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सीपीआई (एम) की उम्मीदवार एम.सी. जोसेफिन को हराकर मट्टनचेरी सीट पर जीत दर्ज की थी। अपने अंतिम दो कार्यकालों में उन्होंने कलामस्सेरी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। 2016 के विधानसभा चुनाव में वे कलामस्सेरी से विधायक चुने गए थे।

पलारिवट्टम फ्लाईओवर निर्माण में घोटाले के चलते हुए था गिरफ्तार

वीके इब्राहिम कुंजू ने राज्य सरकार में उद्योग मंत्री और सामाजिक कल्याण मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। 4 जनवरी 2005 को मुस्लिम लीग के वरिष्ठ नेता और तत्कालीन उद्योग मंत्री पीके कुन्हालीकुट्टी के इस्तीफे के बाद उन्हें यूडीएफ मंत्रिमंडल में शामिल किया गया। इसके बाद 6 जनवरी 2005 को उन्होंने उद्योग और सामाजिक कल्याण मंत्री का पद संभाला। वहीं, 23 मई 2011 से 20 मई 2016 तक उन्होंने केरल सरकार में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री के रूप में कार्य किया। हालांकि, नवंबर 2020 में उनके राजनीतिक जीवन को बड़ा झटका लगा, जब उन्हें पलारिवट्टम फ्लाईओवर निर्माण में कथित भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया। सतर्कता एवं भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो ने इस मामले में कार्रवाई की थी। इसके बावजूद, उनके समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उनकी राजनीतिक पहचान और योगदान को अहम माना जाता रहा।

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