ईरान पर हमले से हिला पूरा विश्व, सोना-चांदी और क्रिप्टो में उछाल, शेयर बाजार में गिरावट की आशंका

KNEWS DESK- ईरान पर अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त ऑपरेशन ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हलचल मचा दी है। जानकारों का मानना है कि यह हमला साधारण नहीं बल्कि वैश्विक तेल और वित्तीय बाजारों पर गहरा असर डालने वाला है।

इंटरनेशनल बैन के बावजूद ईरान रोजाना लगभग 3.3 मिलियन बैरल कच्चा तेल उत्पादन कर रहा था, जिसका 80% से अधिक हिस्सा चीन को सप्लाई होता है। इसके अलावा, ईरान के पास Hormuz Strait है, जिससे दुनिया के लगभग 20% तेल का ट्रैफिक गुजरता है। अगर यह मार्ग बंद हो जाता है, तो वैश्विक तेल संकट गहरा सकता है।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस जियो-पॉलिटिकल टेंशन के चलते कच्चे तेल की कीमतों में 5 से 10% तक इजाफा देखने को मिल सकता है। मौजूदा समय में खाड़ी देशों का कच्चा तेल 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है, जो 80 डॉलर तक जा सकता है। डीसेंट्रलाइज्ड एक्सचेंज पर तेल की कीमतों में पहले ही 8% से ज्यादा का उछाल देखा गया है।

जियो-पॉलिटिकल तनाव की वजह से निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं। Gold और Silver की कीमतों में शॉर्ट-टर्म में 10 से 15% तक बढ़ोतरी की संभावना है। भारत में सोने के दाम 1.85 लाख रुपए प्रति दस ग्राम और चांदी 3.20 लाख रुपए तक जा सकते हैं। इंटरनेशनल मार्केट में चांदी 100 डॉलर के पार ट्रेड कर रही है।

अमेरिका और अन्य ग्लोबल शेयर बाजारों में 1 से 2% तक गिरावट का अनुमान है। डीसेंट्रलाइज्ड एक्सचेंज पर नैस्डैक में पहले ही 1% से अधिक की गिरावट देखी गई है। भारत में भी BSE Sensex और निफ्टी में सोमवार को 1 से 2% तक की गिरावट हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सेंसेक्स 80,000 अंकों से नीचे जा सकता है।

क्रिप्टोकरेंसी मार्केट भी इस तनाव से प्रभावित हुआ है। शनिवार को बिटकॉइन की कीमत 63,000 डॉलर के स्तर तक गिर गई। हालांकि रविवार को 2.5% की तेजी आई, लेकिन आने वाले दिनों में 3 से 10% तक की गिरावट की संभावना है। वहीं, ऑयल ईटीएफ में निवेश के रिटर्न अमेरिकी शेयर बाजार को पीछे छोड़ सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों को इस समय सावधानी से काम लेना चाहिए। तेल, सोना और चांदी जैसी सुरक्षित संपत्तियों में निवेश करना लाभकारी हो सकता है, जबकि शेयर बाजार और क्रिप्टोकरेंसी में उतार-चढ़ाव का ध्यान रखना जरूरी है।