समुद्र में बढ़ता भारत का दबदबा! हिंद महासागर से लाल सागर तक जयशंकर का बड़ा बयान

k News Desktop- भारत के विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने हिंद महासागर क्षेत्र की रणनीतिक स्थिति, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा में भारत की भूमिका पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक तनाव के दौर में भारतीय नौसेना समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

जयशंकर ने कहा कि हाल के समय में लाल सागर और आसपास के समुद्री मार्गों पर हूती आंदोलन की ओर से कई हमले किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे हमलों की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे हालात में भारतीय नौसेना ने कई व्यापारी जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की है और समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित बनाए रखने के लिए लगातार सक्रिय भूमिका निभा रही है।

उन्होंने व्यापारी जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि दुनिया भर के जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक काम करते हैं। ऐसे में जब भी किसी तेल टैंकर या व्यापारी जहाज पर हमला होता है तो अक्सर उसमें भारतीय नागरिक भी मौजूद होते हैं। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में ऐसे हमलों में भारतीयों की जान भी गई है। इसके बावजूद भारत अन्य देशों के साथ मिलकर समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए काम कर रहा है।

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र में एक नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर के रूप में काम करता है। हालांकि यह भूमिका क्षेत्र की जटिल भू-राजनीतिक परिस्थितियों को समझते हुए निभाई जाती है। उन्होंने कहा कि भारत सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान देता है और साथ ही क्षेत्र के शक्ति संतुलन को भी ध्यान में रखता है। इसी तरह लाल सागर क्षेत्र में भी भारत सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में भूमिका निभा रहा है।

सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि हिंद महासागर की वास्तविकता को समझना जरूरी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि डिएगो गार्सिया में लगभग 50 वर्षों से विदेशी सैन्य मौजूदगी है, जबकि Djibouti में भी कई देशों के सैन्य ठिकाने हैं। उन्होंने हम्बनटोटा बंदरगाह और अमेरिकी पांचवां बेड़ा का भी उल्लेख किया और कहा कि इस क्षेत्र में विभिन्न वैश्विक शक्तियों की मौजूदगी एक स्थापित वास्तविकता है।

ईरान से जुड़े जहाज विवाद के संदर्भ में भारत और श्रीलंका के विदेश मंत्रियों ने दोहराया कि समुद्री मामलों में अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि का पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समुद्री विवादों का समाधान नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के तहत होना चाहिए।

जयशंकर ने कहा कि भारत का उदय उसकी अपनी क्षमताओं और प्रयासों पर निर्भर करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति पूरे हिंद महासागर क्षेत्र के लिए एक “उठती हुई लहर” की तरह है, जिससे आसपास के देशों को भी लाभ होगा।

उन्होंने कहा कि हिंद महासागर दुनिया का एकमात्र महासागर है जिसका नाम किसी देश के नाम पर रखा गया है। यह इस क्षेत्र के साथ भारत के ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों को दर्शाता है। उन्होंने श्रीलंका में आए चक्रवात का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने आपदा के 24 घंटे के भीतर ही सहायता पहुंचाई थी। उन्होंने इसे भारत की मानवीय सहायता और आपदा राहत क्षमता का उदाहरण बताया।

विदेश मंत्री ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से मानसून आधारित व्यापार और संपर्क का प्राकृतिक नेटवर्क रहा है, जिसे औपनिवेशिक दौर में काफी नुकसान पहुंचा। अब यह क्षेत्र फिर से पुनर्निर्माण और नए संपर्क तंत्र की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत पूर्व और पश्चिम के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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