KNEWS DESK- ईरान में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन लगातार उग्र होते जा रहे हैं। गुरुवार को देशभर में हुए प्रदर्शन पिछले दो हफ्तों से जारी आंदोलन के सबसे बड़े प्रदर्शनों में गिने जा रहे हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए ईरानी सरकार ने इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दीं, जिससे देश का बाहरी दुनिया से संपर्क काफी हद तक कट गया।
यह आंदोलन 28 दिसंबर को आर्थिक संकट और महंगाई के विरोध में शुरू हुआ था, जब कई शहरों में दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर दी थीं। धीरे-धीरे यह विरोध पूरे देश में फैल गया और अब राजधानी तेहरान समेत कई प्रमुख शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। गुरुवार को निर्वासित युवराज रजा पहलवी की अपील के बाद प्रदर्शनों ने और तेज रूप ले लिया। रात के समय लोगों ने घरों की छतों से सरकार विरोधी नारे लगाए और कई इलाकों में खुलेआम प्रदर्शन किए।
प्रदर्शन बढ़ने के साथ ही सरकार ने इंटरनेट, मोबाइल और लैंडलाइन सेवाओं को बंद कर दिया। इससे पहले भी ईरान में विरोध प्रदर्शनों के दौरान संचार माध्यमों पर पाबंदी लगाई जाती रही है, ताकि आंदोलन की जानकारी देश और दुनिया तक न पहुंच सके।
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान सामने आया है। उन्होंने ईरानी अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों की हत्या नहीं की जानी चाहिए। ट्रंप ने ईरान के लोगों को “बहादुर” बताते हुए कहा कि अगर दमन जारी रहा तो इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। 28 दिसंबर को आंदोलन शुरू होने के बाद यह तीसरी बार है जब ट्रंप ने ईरान को इस तरह की चेतावनी दी है।
एक पॉडकास्ट बातचीत में ट्रंप ने कहा कि ईरानी जनता आजादी चाहती है और उनके साथ जो हुआ है, वह शर्मनाक है। जब उनसे निर्वासित युवराज रजा पहलवी से मुलाकात के सवाल पर पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि पहले ईरान की स्थिति को देखेंगे, उसके बाद किसी विपक्षी नेता के समर्थन या मुलाकात पर फैसला लेंगे।
ट्रंप के बयान के बाद रजा पहलवी ने उनकी सराहना की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर उन्होंने लिखा कि लाखों ईरानियों ने अपनी आजादी के लिए आवाज उठाई, लेकिन इसके जवाब में शासन ने सभी संचार माध्यम बंद कर दिए। उन्होंने ट्रंप को “मुक्त विश्व का नेता” बताते हुए अन्य वैश्विक नेताओं, खासकर यूरोपीय देशों से भी ईरानी जनता के समर्थन में आगे आने की अपील की।
पहलवी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तकनीकी, वित्तीय और कूटनीतिक स्तर पर प्रयास कर ईरान में संचार व्यवस्था बहाल करवानी चाहिए, ताकि जनता की आवाज दुनिया तक पहुंच सके।
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, दिसंबर में शुरू हुए प्रदर्शनों के बाद से अब तक कम से कम 36 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,000 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है।
बढ़ते प्रदर्शनों, सरकार की सख्ती और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं के बीच ईरान में हालात तेजी से तनावपूर्ण होते जा रहे हैं और आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।