भारत-अमेरिका डील जल्द! ट्रंप के बड़े बयान से बाजार में रैली की उम्मीद

KNEWS DESK- भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते को लेकर चल रही अटकलों के बीच एक अहम संकेत सामने आया है। खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस में भारत के साथ डील को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया है। उन्होंने न सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुले तौर पर सराहना की, बल्कि यह भी कहा कि दोनों देश एक “अच्छे समझौते” की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

ट्रंप ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर पूछे गए सवाल का संक्षिप्त लेकिन उत्साहजनक जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें भारत के साथ बेहतर समझौते की पूरी उम्मीद है। उनके इस बयान को ऐसे समय में खास माना जा रहा है, जब भारतीय शेयर बाजार हाल के दिनों में दबाव में रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह टिप्पणी निवेशकों के भरोसे को दोबारा मजबूत कर सकती है।

दरअसल, भारत और अमेरिका के बीच व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते और आपसी टैरिफ में कटौती को लेकर अब तक छह दौर की बातचीत हो चुकी है। दोनों देश लंबे समय से चले आ रहे व्यापार विवादों को सुलझाने की कोशिश में हैं। फरवरी में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात के बाद यह प्रक्रिया और तेज हुई। इसी दौरान ‘मिशन 500’ की घोषणा की गई, जिसके तहत 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।

ट्रंप के ताजा बयान का सीधा असर उन भारतीय कंपनियों पर देखने को मिल सकता है, जिनका कारोबार बड़े पैमाने पर अमेरिका को निर्यात पर निर्भर है। खास तौर पर टेक्सटाइल, झींगा फीड निर्यात और फार्मा सेक्टर एक बार फिर निवेशकों की नजर में आ गए हैं।

फिलहाल फार्मा सेक्टर पर किसी तरह का टैरिफ लागू नहीं है, जिससे यह सेक्टर अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जा रहा है। वहीं टेक्सटाइल सेक्टर को बीते समय में टैरिफ का सबसे ज्यादा झटका लगा है। Gokaldas Exports, Welspun Living और Pearl Global जैसी कंपनियों की 50 से 70 प्रतिशत तक की आमदनी अमेरिकी बाजार से आती है। ऐसे में टैरिफ में किसी भी तरह की राहत इनके मुनाफे और शेयर कीमतों के लिए बड़ा सकारात्मक संकेत साबित हो सकती है।

कुल मिलाकर, ट्रंप के बयान ने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर एक बार फिर उम्मीद जगा दी है। अगर आने वाले महीनों में बातचीत ठोस नतीजों तक पहुंचती है, तो इसका असर सिर्फ कूटनीतिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि भारतीय शेयर बाजार और निर्यात आधारित उद्योगों पर भी साफ दिखाई दे सकता है।

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