KNEWS DESK- Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक संपर्क तेज हो गया है। पिछले 24 घंटों के दौरान दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच तीन अलग-अलग मौकों पर बातचीत हुई है।
ताजा घटनाक्रम में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने नई दिल्ली में आयोजित Raisina Dialogue के दौरान ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबज़ादेह से मुलाकात की। हालांकि दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के विस्तृत विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन इसे मौजूदा क्षेत्रीय हालात के संदर्भ में अहम माना जा रहा है।
इससे पहले गुरुवार को जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi से फोन पर बातचीत की थी। वहीं उसी दिन भारत के विदेश सचिव Vikram Misri नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास पहुंचे थे, जहां ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर Ali Khamenei को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित शोक सभा में उन्होंने शोक रजिस्टर पर हस्ताक्षर किए।
दिल्ली में मौजूद ईरान के उप विदेश मंत्री खातिबजेद ने पत्रकारों से बातचीत में अमेरिकी प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि Donald Trump किसी दूसरे देश के नेतृत्व का फैसला नहीं कर सकते।
खातिबजेद ने कहा, “ट्रंप न्यूयॉर्क के मेयर का चुनाव भी नहीं कर सकते, फिर वे ईरान के सुप्रीम लीडर को कैसे तय कर सकते हैं? यह एक तरह का औपनिवेशिक नजरिया है।” उन्होंने यह भी कहा कि ईरान का राष्ट्रपति लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुना जाता है और किसी बाहरी ताकत को उसमें दखल देने का अधिकार नहीं है।
खातिबजेद ने ईरानी जहाज IRIS Dena के हिंद महासागर में डूबने की घटना पर भी दुख जताया। उन्होंने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी और जहाज पर कोई हथियार नहीं थे। इस हादसे में कई युवा ईरानी नौसैनिकों की मौत हो गई।
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष को लेकर भारत ने तटस्थ रुख अपनाया है। भारत ने शुरुआत से ही क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई है।
इस बीच Narendra Modi ने भी सैन्य संघर्ष को लेकर बड़ा बयान दिया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी समस्या का समाधान युद्ध नहीं हो सकता और सभी पक्षों को बातचीत के जरिए समाधान तलाशना चाहिए।
मौजूदा हालात में भारत की कूटनीतिक सक्रियता इस बात का संकेत है कि वह क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए संवाद की प्रक्रिया को बढ़ावा देना चाहता है।