अमेरिका के दबाव में बदला रुख? गाजा पीस बोर्ड में पाकिस्तान की एंट्री के पीछे ये 5 बड़े फैक्ट्स

KNEWS DESK – पाकिस्तान की सियासत एक बार फिर गाजा मुद्दे पर उबाल पर है। गाजा पीस बोर्ड के प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के हस्ताक्षर होते ही देश में हंगामा मच गया है। विपक्ष ने सरकार पर अमेरिका के आगे झुकने का आरोप लगाया है। इसी बीच सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान का एक पुराना वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वह गाजा को लेकर शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर की भूमिका पर सवाल उठाते नजर आ रहे हैं।

इमरान खान का दावा है कि अमेरिका के दबाव के चलते शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर गाजा मुद्दे पर चुप्पी साध लेंगे। उनका कहना है कि पाकिस्तान की मौजूदा सरकार और सैन्य नेतृत्व वॉशिंगटन को नाराज करने की स्थिति में नहीं हैं।

गाजा पर बदला पाकिस्तान का रुख

गौरतलब है कि पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र मुस्लिम देश है, जिसके पास परमाणु हथियार हैं। देश की स्थापना के बाद से ही गाजा के मुद्दे पर पाकिस्तान का रुख मुस्लिम पक्ष के समर्थन में रहा है। पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना ने भी साफ कहा था कि गाजा पर मुसलमानों का ही अधिकार होना चाहिए। ऐसे में गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने के फैसले को पाकिस्तान की पारंपरिक नीति से बड़ा यू-टर्न माना जा रहा है।

क्यों लिया पाकिस्तान ने यू-टर्न? 5 बड़ी वजहें

  1. अमेरिका का दबाव और वीजा प्रतिबंध
    हाल ही में अमेरिका ने पाकिस्तानियों के इमिग्रेशन वीजा पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया था। गाजा पीस बोर्ड में शामिल 11 देशों के नागरिकों पर भी ऐसे प्रतिबंध लगे हैं। माना जा रहा है कि पाकिस्तान इस बोर्ड में शामिल होकर अमेरिका को खुश करने की कोशिश कर रहा है, ताकि वीजा बैन हट सके।
  2. कमजोर लोकतंत्र और राजनीतिक अस्थिरता
    पाकिस्तान में 2024 के चुनावों को लेकर धांधली के आरोप लगे थे। विपक्षी नेता इमरान खान लगातार अंतरराष्ट्रीय समर्थन की मांग कर रहे हैं। ऐसे में सरकार किसी भी हाल में अमेरिका को नाराज नहीं करना चाहती।
  3. सऊदी अरब और तुर्की का साथ जरूरी
    पाकिस्तान अपनी बिगड़ती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए सऊदी अरब और तुर्की पर निर्भर है। दोनों देश पहले ही गाजा पीस बोर्ड में शामिल हो चुके हैं। सऊदी ने पाकिस्तान के हेल्थ सेक्टर में बड़े निवेश का ऐलान भी किया है, ऐसे में पाकिस्तान के पास विरोध का विकल्प सीमित था।
  4. चीन से दूरी दिखाने की मजबूरी
    गाजा पीस बोर्ड का नेतृत्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कर रहे हैं, जबकि चीन ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तान नहीं चाहता कि उस पर चीन के करीबी होने का ठप्पा लगे, इसलिए उसने अमेरिका के नेतृत्व वाले इस बोर्ड का हिस्सा बनना बेहतर समझा।
  5. सेना प्रमुख आसिम मुनीर की निर्णायक भूमिका
    पाकिस्तान में बड़े नीतिगत फैसलों में सेना प्रमुख की भूमिका अहम मानी जाती है। आसिम मुनीर को अमेरिका का करीबी माना जाता है और ट्रंप उन्हें अपना पसंदीदा बता चुके हैं। अमेरिका ने मुनीर के जरिए पाकिस्तान में कई निवेश भी किए हैं। ऐसे में गाजा पीस बोर्ड में शामिल होने का फैसला सैन्य नेतृत्व की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

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