KNEWS DESK- बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) ने आम चुनावों में निर्णायक बढ़त बनाते हुए बहुमत हासिल कर लिया है। गुरुवार देर रात तक चली मतगणना के बाद सामने आए अनौपचारिक परिणामों के अनुसार, बीएनपी गठबंधन ने 299 में से 287 सीटों पर हुई गिनती में 211 सीटें जीत ली हैं। इसके साथ ही करीब दो दशकों बाद पार्टी के सत्ता में लौटने का रास्ता साफ होता दिख रहा है।
अवामी लीग सरकार के पतन के बाद बनी अंतरिम व्यवस्था के स्थान पर हुए इन चुनावों को बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा था। अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग इस बार चुनावी मैदान में नहीं थी।
बीएनपी अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान ने अपने गृह जिले बोगुरा से जीत दर्ज की। उन्हें 2,16,284 वोट मिले, जबकि जमात के उम्मीदवार आबिदुर रहमान को 97,626 वोट प्राप्त हुए।
बीएनपी पहले ही संकेत दे चुकी है कि सत्ता में आने पर तारिक रहमान को प्रधानमंत्री बनाया जाएगा, जिससे मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार का 18 महीने का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा।
अनौपचारिक नतीजों के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी 70 सीटों पर सिमट गई, जबकि अन्य दलों ने 6 सीटें जीतीं। ढाका के एक निर्वाचन क्षेत्र में जमात प्रमुख शफीकुर रहमान को 82,645 वोट मिले और वे विजेता घोषित किए गए। उनके बीएनपी प्रतिद्वंद्वी को 61,920 वोट प्राप्त हुए।
बीएनपी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने ठाकुरगांव से 2,34,144 वोटों के साथ जीत हासिल की। वहीं जमात के महासचिव मिया गुलाम पोरवार को खुलना में अपने बीएनपी प्रतिद्वंद्वी अली असगर लॉबी से हार का सामना करना पड़ा।
13वें संसदीय चुनाव के साथ 84 सूत्रीय सुधार कार्यक्रम—‘जुलाई राष्ट्रीय चार्टर’—पर जनमत संग्रह भी कराया गया। शाम 4:30 बजे मतदान समाप्त होते ही मतगणना शुरू हो गई थी।
चुनाव आयोग ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। देशभर में लगभग 10 लाख सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई, जो बांग्लादेश के चुनावी इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी सुरक्षा व्यवस्था मानी जा रही है।
जमात-ए-इस्लामी ने 1971 में पाकिस्तान से बांग्लादेश की स्वतंत्रता का विरोध किया था। इस बार पार्टी संवैधानिक रूप से धर्मनिरपेक्ष देश में इस्लामी नेतृत्व वाली सरकार बनाने की उम्मीद कर रही थी, लेकिन मतदाताओं ने बीएनपी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत देकर सत्ता परिवर्तन का संकेत दे दिया है।
अनौपचारिक नतीजों के आधार पर अब सबकी निगाहें औपचारिक घोषणा और नई सरकार के गठन पर टिकी हैं।