KNEWS DESK- अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance इस्लामाबाद पहुंच गए हैं। वे अमेरिकी वायुसेना के Boeing C-32A विमान से यात्रा कर रहे थे और बताया जा रहा है कि उन्होंने अपनी उड़ान के दौरान ईरानी हवाई क्षेत्र से परहेज किया। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया में तनाव और कूटनीतिक गतिविधियां तेज हैं।
इस बीच ईरान की ओर से भी एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने लगभग 80 सदस्यीय दल तैयार किया है, जिसमें विदेश मंत्री अब्बास अराघची और सैन्य व कूटनीतिक अधिकारी शामिल हैं। ईरान ने वार्ता के दौरान कुछ शर्तें भी रखी हैं, जिनमें लेबनान में संघर्ष रोकने और विभिन्न देशों—जिनमें कतर और दक्षिण कोरिया शामिल हैं—में जमी ईरानी संपत्तियों को वापस करने की मांग प्रमुख है।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच यह बातचीत पाकिस्तान के माध्यम से हो रही है। इस बैठक में कई शीर्ष अमेरिकी अधिकारी भी शामिल हैं, जिनमें उपराष्ट्रपति JD Vance के अलावा ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और विदेश मंत्री Marco Rubio शामिल बताए जा रहे हैं।
रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड के वरिष्ठ अधिकारी भी इस वार्ता का हिस्सा हैं। वहीं ईरान की ओर से भी उच्च स्तरीय सैन्य और कूटनीतिक टीम मौजूद है।
इसी बीच अमेरिकी खुफिया आकलन में कहा गया है कि ईरान के पास अभी भी बड़ी संख्या में मिसाइलें और ड्रोन क्षमताएं मौजूद हैं। हालिया तनाव और हमलों के बावजूद ईरान की सैन्य ताकत को पूरी तरह कमजोर नहीं किया जा सका है।
विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है, और यही कारण है कि अमेरिका इस मुद्दे पर कूटनीतिक समाधान की कोशिशों को प्राथमिकता दे रहा है।
फिलहाल, इस्लामाबाद में चल रही इन उच्चस्तरीय बैठकों पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इनके परिणाम वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया की स्थिरता पर बड़ा असर डाल सकते हैं।